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नामचीन शायरों कवियों की कहानी, उनके शहर के बाशिंदों की जुबानी

कैफ़ी आज़मी की एक नज़्म सुन शौक़त ने तोड़ दी थी अपनी मंगनी

  • राजेश कुमार यादव, आज़मगढ़
  • शनिवार, 19 अगस्त 2017

मज़लूमों के शायर कैफ़ी आज़मी ने एकबार कहा था कि "मैं ग़ुलाम हिन्दुस्तान में पैदा हुआ,आज़ाद हिन्दुस्तान में बूढ़ा हुआ और सोशलिस्ट हिन्दुस्तान में मर जाऊंगा।" कैफ़ी को याद कर रहे हैं राजेश यादव।

'हुमा' की नसों में ख़ून भी दौड़ा और कविता भी

  • अशोक बंसल, मथुरा
  • गुरुवार, 10 अगस्त 2017

मथुरा के लाडले शायर और कवि महेंद्र 'हुमा' को याद कर रहे हैं मथुरा से अशोक बंसल।

जिगर मुरादाबादी: ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे...

  • डॉ. मुजफ़्फ़र हुसैन ग़ज़ाली
  • बुधवार, 9 अगस्त 2017

जिगर को अपने शहर से प्यार था और यहां के लोग भी उन्हें बहुत चाहते थे। जिगर के कई किस्से मशहूर हैं।

जब बशीर बद्र को अपना शहर मेरठ अजनबी लगने लगा...

  • अतुल सिन्हा, नई दिल्‍ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

दाग़ का नाम लो तो फ़लक से चांद हंसता है

  • संजय अभिज्ञान / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017

दिल्ली का वो पहला सुख़नवर जिससे मेरा साबका पड़ा...

  • प्रताप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
  • शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

हसरत मोहानी: "हज़ार खौफ़ हों पर ज़ुबां हो सच की रफ़ीक़"

  • पंकज शुक्ल / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 2 जुलाई 2017
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