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शीन काफ़ निज़ाम: अब तो अक्‍सर नज़र आ जाता है दिल आँखों में...

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • रविवार, 17 सितंबर 2017

उर्दू के मशहूर शायर शीन काफ़ निज़ाम का नाम दरअसल शिव कृष्‍ण बिस्‍सा है। निज़ाम साहब ख़ालिस हिंदुस्‍तानी तहज़ीब की नुमाइंदगी करते हैं।

अहमद फ़राज़ : विचारों से घोर प्रगतिशील और शायरी में ग़ज़ब के आशिक़

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • रविवार, 10 सितंबर 2017

मशहूर शायर फ़राज़ साहब का ख़ानदानी ताल्लुक सूफी परंपरा से जुड़ता है और वह कोहाट के मशहूर संत हाजी बहादुर के वंशज है और उनका नाम भी है उसी तर्ज पर सैयद अहमद शाह। फ़राज़ की शख़्सियत को याद कर रहे हैं राकेश मिश्रा।

मजाज़ लखनवी: 'मजाज़ की किताब को लड़कियां तकिए में छिपा कर रखतीं थीं'

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • रविवार, 3 सितंबर 2017

उर्दू शायरी ने वह दौर भी देखा है जब नौजवान लड़कियां शायरों के चित्र अपने सिरहाने रखती थीं और दीवान अपने सीने से लगाए फिरती थीं। शायरी का यह दौर लाने वालों में सबसे पहला और प्रमुख नाम असरार-उल-हक़ मजाज़ का आता है।

गीतकार शैलेंद्र के अंदाज़-ए-बयां पर झूमते थे अल्फ़ाज़

  • अकरम रज़ा हिंदी / नई दिल्ली
  • गुरुवार, 31 अगस्त 2017

एक हरफ़नमौला सुपरस्टार गुलज़ार

  • अमर शर्मा, दिल्ली
  • बुधवार, 23 अगस्त 2017

सुदर्शन फ़ाकिर: तेरी आँखों में हम ने क्या देखा, कभी क़ातिल कभी ख़ुदा देखा

  • अमर शर्मा, नई दिल्ली
  • सोमवार, 21 अगस्त 2017

दुनियाभर के करोड़ों ग़ज़ल प्रेमियों को अपनी रचनाओं से दीवाना बनाने वाले सुदर्शन फ़ाकिर ने मोहब्बत, ज़िंदगी और उदासी को नए मायने दिए।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने ब्रिटिश भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल की नौकरी छोड़ी थी

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • रविवार, 20 अगस्त 2017

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, यह वह आवाज़ है जो साहित्‍य के मयारों को बदलने की बात करती है, उसके उद्देश्‍यों को बड़ा करके देखने की माँग करती है। फ़ैज़ को याद कर रहे हैं कहानीकार राकेश मिश्रा।

"ग़रीबों की मुहब्बत का मज़ाक उड़ाता है ताजमहल"

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • बुधवार, 16 अगस्त 2017

अपने फ़िल्‍मी गीतों और अमृता प्रीतम व सुधा मल्‍होत्रा के साथ अपने इश्‍क के चर्चों को लेकर ‘साहिर’ की छवि एक रोमैंटिक शायर की बनती है। मशहूर शायर साहिर लुधियानवी को याद कर रहे हैं राकेश मिश्रा।

शमशेर की शायरी: सीधे दिल से दिल की बात करते हैं

  • राकेश मिश्रा, वर्धा
  • सोमवार, 31 जुलाई 2017

तो इसलिए मुझे पसंद हैं रामधारी सिंह 'दिनकर' 

  • शरद मिश्र/ अमर उजाला नई दिल्‍ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

अवधूत 'निराला' की ओजस्वी कविताएं मिटाती हैं अंधकार 

  • शरद मिश्र, नई दिल्‍ली
  • शुक्रवार, 14 जुलाई 2017
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