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मैं इनका मुरीद

जीवन के हर पड़ाव में

Ghanshyam Bairagi

19 कविताएं

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जीवन के हर पड़ाव में
साहित्य,
रग-रग में बसा है ।

न छोटा,
ना बड़ा यहाँ कोई,
सभी तो बस,
एक मंच में खड़ा है ।।

कभी,
कर्म पथ पर चलते हुए 
मुहावरे और लोकोक्तियां,
यहीं तो गढ़ा है ।।

तू डाल-डाल
मैं पात-पात 
नाच न जाने
आँगन टेढ़ा ।।

साहित्य तो ऐसे ही 
गढ़ता हुआ,
संग चलते चला है ।।

- घनश्याम जी.बैरागी
   नंदिनी, भिलाईनगर
   छत्तीसगढ़ 

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