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mere pita ji

मैं इनका मुरीद

मेरे पिता जी

Ghanshyam Bairagi

21 कविताएं

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☆ मेरे पिताजी जी ☆

सुबह सवेरे
कड़कती ठंड में,
स्कूल की जब
याद दिलाते ;
वो थे मेरे पिताजी ।
मैं पीछे ही रह जाता
वह,
सवारी में पहले
मुझे बिठाते
वो थे मेरे पिताजी ।

ठंड में सिकुड़कर
पीछे बैठा ;
मैं भी खूब इतराता,
साथ मेरे
स्कूल जाने को
सबसे पहले ;
वो आते थे मेंरे पिताजी ।

आज हमें जब
अपने बच्चे,
शुबह सवेरे कहे उठाते ;
चल पापा चल
स्कूल जाते,
देर कहीं न हो ना जाए ।

याद आते
वो ;
बिते दिन की,
क्षवि दिखाते पिताजी की ।
बच्चे हमारे
या,
हम बच्चे के ;
याद है आते
बिते दिनों की,
कितने अच्छे थे
मेरे पिताजी ।।
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- घनश्याम बैरागी


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