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खंडहर हो चुकी है शकील बदायूंनी की ‘शकील मंज़िल’

  • राजीव शर्मा/अमर उजाला, बदायूं
  • शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

तीन अगस्त 1916 को शकील साहब यहीं जन्मे थे। शकील साहब की शायरी का तसव्वुर इसी शहर में पैदा हुआ।

'आंखों की रोशनी नहीं रही, फिर भी शायरी की थी चाह' 

  • शरद मिश्र, नई दिल्‍ली
  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

ये मुलाकात एक बहाना है...कई सदियों से कई जन्मों से...चांदनी रात में एक बार तुझे देखा है...और प्यार का दर्द है मीठा-मीठा... जैसे मखमली गीतों की रचना करने वाले नक़्श लायलपुरी को उर्दू और शायरी से बहुत लगाव था।

इंदीवर: जब गीतों से आने लगी मिट्टी की ख़ुशबू

  • आसिफ इकबाल, नई दिल्ली
  • सोमवार, 24 जुलाई 2017

'बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम, प्यार की दुनिया में ये पहला क़दम'

अशोक चक्रधर: कविता से जग को हंसाना है इनका शगल

  • विजय जैन, नई दिल्‍ली
  • रविवार, 23 जुलाई 2017

आनंद बख़्शीः जिनके गीतों ने बख़्शी बॉलीवुड को मोहब्बत 

  • आसिफ़  इक़बाल, नई दिल्‍ली
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

जिगर: अपनी रवायतों का एक ज़िंदादिल शायर

  • शरद मिश्र, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017

​हरिवंश राय बच्चन: ख़्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की...

  • मुकेश झा, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017

नज़ीर अकबराबादी से बड़ा डेमोक्रेटिक कैनवास किसी शायर के पास नहीं

  • संजय अभिज्ञान, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017

एक अकेली नज्‍़म में हजार चीजों की खबर देने वाले ये शब्दचित्र आगरा के शायर वली मुहम्मद के हैं जो बाद में नज़ीर अकबराबादी के नाम से मशहूर हुए।

कैलाश खेर: ...अड़ियल बैरागी हूं, ज़िद्दी अनुरागी हूं

  • अतुल सिन्हा, नई दिल्‍ली
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017

शब्दों और अलंकारों का अपार भंडार। भक्ति और रीति काल को आधुनिकतम रूपों में ढालने की महारथ। आवाज़ की वो ऊंचाई और गहराई जहां पहुंच पाना कम से कम आज के गायकों के लिए आसान नहीं।

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