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Satire of Suresh Upadhyay

हास्य

सुरेश उपाध्याय : दफ़्तर का एक बाबू मरा, सीधा नरक में जा कर गिरा...

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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'दफ़्तर का बाबू'

दफ़्तर का एक बाबू मरा
सीधा नरक में जा कर गिरा
न तो उसे कोई दुख हुआ
ना ही वो घबराया
यों खुशी में झूम कर चिल्लाया–
‘वाह वाह क्या व्यवस्था है‚ क्या सुविधा है‚
क्या शान है! नरक के निर्माता तू कितना महान है!
आंखों में क्रोध लिये यमराज प्रगट हुए
बोले‚
‘नादान दुख और पीड़ा का
यह कष्टकारी दलदल भी
तुझे शानदार नज़र आ रहा है?’
बाबू ने कहा‚
‘माफ करें यमराज।
आप शायद नहीं जानते
कि बंदा सीधा हिंदुस्तान से आ रहा है।’

 - सुरेश उपाध्याय 

हास्य कवि सुरेश उपाध्याय का जन्म 15 जुलाई 1943 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ। वह सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर व्यंग्य के लिए मशहूर हैं। उन्हें 1982 में काका हाथरसी हास्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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