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rajesh joshi poetry on life and love

इरशाद

राजेश जोशी: हवा के हज़ार घोड़े, हजार घोड़ों पर आई रात...

काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली

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      नींद

हवा के हज़ार घोड़े

हजार घोड़ों पर आई रात
बहुत सारा माल असबाब
करोड़ों लोगों की नींद
बच्चों बड़ों-बूढ़ों
और जवान प्रेमी-प्रेमिकाओं के सपने

लादे हुए
जरा सी 

अनजाने ही हो जाए
भूल-चूक
कैसा बवेला मचे
लोगों की नींद में !

एक नन्ही सी अकेली जान
बिचारी पर
कितनी ढेर जिम्मेदारियां


(राजेश जोशी की ये कविता, कविता कोश से साभार ली गई है)

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