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kaka hathrasi funny poems on country

हास्य

काका हाथरसी: वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा, सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा

काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली

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सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा
हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा 

सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है
हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है
लेकर के क़र्ज़ खाओ यह फ़र्ज़ है तुम्हारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

चोरों व घूसखोरों पर नोट बरसते हैं 
ईमान के मुसाफ़िर राशन को तरसते हैं
वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

जब अंतरात्मा का मिलता है हुक्म काका 
तब राष्ट्रीय पूंजी पर वे डालते हैं डाका
इनकम बहुत ही कम है होता नहीं गुज़ारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

हिंदी के भक्त हैं हम, जनता को यह जताते 
लेकिन सुपुत्र अपना कांवेंट में पढ़ाते
बन जाएगा कलक्टर देगा हमें सहारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

फ़िल्मों पे फ़िदा लड़के, फैशन पे फ़िदा लड़की 
मजबूर मम्मी-पापा, पॉकिट में भारी कड़की
बॉबी को देखा जबसे बाबू हुए अवारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

जेवर उड़ा के बेटा, मुम्बई को भागता है 
ज़ीरो है किंतु खुद को हीरो से नापता है
स्टूडियो में घुसने पर गोरखा ने मारा
सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा 

- काका हाथरसी

साभार- कविता कोश 

काका हाथरसी का जन्म 1906 में उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुआ था। वह एक प्रसिद्ध व्यंगकार और हास्य कवि थे। उनकी शख़्सयित का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी पीढ़ी के अन्य कवियों पर उनकी छाप थी। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, भ्रष्टाचार और राजनीतिक कुशासन को अपनी रचनाओं में उतारा। 18 सितंबर 1995 को उनहोंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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