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jemini haryanvi funny poem

हास्य

जैमिनी हरियाणवी: गोरी म्हारे गाम की चाली छम-छम...

काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली

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हास्य कवि जैमिनी हरियाणवी का जन्म हरियाणा में झज्जर ज़िले के बादली गांव में हुआ। उनका वास्तविक नाम देवकी नंदन जैमिनी था। हिंदी हास्य में उनका सशक्त योगदान रहा है। 

गोरी म्हारे गाम की चाली छम-छम,
गलियारा भी कांप गया मर गए हम।

आगरे का घाघरा गोड्या नै भेड़ै
चण्डीगढ़ की चूनरी गालां नै छेड़ै
जयपुर की जूतियां का पैरां पै जुलम,
गलियारा भी...

बोरला बाजूबन्द हार सज रह्या,
हथनी-सी चाल पै नाड़ा बज रह्या।
बोल रहे बिछुए, दम मारो दम,
गलियारा भी..

घुंघटे नै जो थोड़ा-थोड़ा सरकावै,
सब तिथियां का चन्द्रमा नजर आवै।
सारा घूंघट खोल दे तो साधु मांगै रम,
गलियारा..

प्रीत के नशे में चाली डट-डटकै,
चालती परी की पोरी पोरी मटकै।
एटम भरे जोबन का फोड़ गई बम,
गलियारा भी..

टाबर सगले गाम के पीछै पड़ गे,
देखते ही युवका के होश उड़ गे।
बूढ़े-बूढ़े बैठ गए भर कै चिलम,
गलियारा भी..

कूदण लाग्या मन मेरा, बिंध गया तन,
लिक्खण बैठ्या खूबसूरती का वरणन।
कोरा कागज उड़ गया, टूट गी कलम,
गलियारा भी कांप गया, मर गए हम।

(जैमिनी हरियाणवी यह 'हरियाणे की गोरी' कविता 'यार सप्तक' नाम की किताब से ली गई है, यह किताब डायमंड पॉकेट बुक्स से प्रकाशित हुई है।)
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