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father of Hindi literature and theatre famous hindi poet BHARTENDU HARISHCHANDRA hindi ghazal

इरशाद

भारतेंदु हरिश्चंद्र : गले मुझ को लगा लो ऐ दिलदार होली में

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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गले मुझ को लगा लो ऐ दिलदार होली में

गले मुझ को लगा लो ऐ दिलदार होली में 
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में 

नहीं यह है गुलाले-सुर्ख़ उड़ता हर जगह प्यारे 
ये आशिक़ की हैं उमड़ी आहें आतिशबार होली में 

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो 
मनाने दो मुझे भी जाने-मन त्योहार होली में 

'रसा' गर जामे-मय ग़ैरों को देते हो तो मुझको भी 
नशीली आँख दिखलाकर करो सरशार होली में 

- भारतेंदु हरिश्चंद्र 

साभार - हिन्दी की बेहतरीन ग़ज़लें, भारतीय ज्ञानपीठ 
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