आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Irshaad ›   Famous urdu poet Krishna Bihari Noor ghazal zindagi se badi saza hi nahi
Famous urdu poet Krishna Bihari Noor ghazal zindagi se badi saza hi nahi

इरशाद

कृष्ण बिहारी 'नूर' : ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

3346 Views
ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं 

अपने दिल की किसी हसरत का पता देते हैं 
मेरे बारे में जो अफ़वाह उड़ा देते हैं 

ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं 
और क्या जुर्म है पता ही नहीं 

इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं 
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं 

ज़िंदगी मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं

जिसके कारण फ़साद होते हैं 
उसका कोई अता-पता ही नहीं 

कैसे अवतार कैसे पैग़मबर 
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं 

ज़िंदगी की तल्ख़ियाँ अब कौन सी मंज़िला पाएं
इससे अंदाज़ा लगा लो ज़हर महँगा हो गया

ज़िंदगी अब बता कहाँ जाएँ
ज़हर बाज़ार में मिला ही नहीं 

सच घटे या बढ़े तो सच ना रहे 
झूठ की कोई इँतहा ही नहीं 

धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून 
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं 

चाहे सोने के फ्रेम में जड़ दो
आईना झूठ बोलता ही नहीं 

अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है 
‘नूर’ संसार से गया ही नहीं 

- कृष्ण बिहारी 'नूर' 

शायर कृष्ण बिहारी नूर ने इस ग़ज़ल को मुशायरे में पेश किया, वीडियो देखें - 

 
 
Comments
सर्वाधिक पड़े गए
Top
Your Story has been saved!