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ऐसी कविताएं जो आपको गुदगुदाएं

अशोक चक्रधर: फावड़े ने मिट्टी काटने से इंकार कर दिया

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

फावड़े ने मिट्टी काटने से इंकार कर दिया और बदरपुर पर जा बैठा एक ओर।

अंग्रेज़ी प्राणन से प्यारी, चले गए अंग्रेज़ छोड़ि याहि....

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

ये रानी बनिके है बैठी, चाची, ताई और महतारी। उच्च नौकरी की ये कुंजी, अफसर यही बनावनहारी।

मिटा देंगे सबका नामो-निशान, बना रहे हैं नया राष्ट्र ‘मूर्खितान’...

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

स्वतंत्र भारत के बेटे और बेटियों ! माताओ और पिताओ, आओ, कुछ चमत्कार दिखाओ। 

शैल चतुर्वेदी: हमारी शादी को बरसों बीत गए...

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

काका हाथरसी: वोटर से वोट लेकर वे कर गए किनारा, सारे जहां से अच्छा है इंडिया हमारा

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

ओम प्रकाश आदित्य: दाल-रोटी दी तो दाल-रोटी खा के सो गया मैं...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 1 अक्टूबर 2017

सुरेश उपाध्याय : दफ़्तर का एक बाबू मरा, सीधा नरक में जा कर गिरा...

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

सुरेन्द्र मोहन मिश्र: एक कवयित्री सम्मेलन में पधारने का आदेश...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 25 सितंबर 2017

बांग्लादेश की तहर से, एक नया स्वतंत्र राज्य बना था, महिला देश

काका हाथरसी: खान-पान की कृपा से, तोंद हो गई गोल...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017

पद्म श्री काका हाथररसी की हास्य कविता 'कौन क्या-क्या खाता है'

हास्य कवि सुरेश उपाध्याय की कविता 'गुमशुदा की तलाश'

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 17 सितंबर 2017

मेरा भी एक बेटा था, वह गुम हो गया है, उसे गुमे एक महीना हो गया है, अभी तक किसी ने भी नहीं दिया है मुझे उसके पता

जैमिनी हरियाणवी: गोरी म्हारे गाम की चाली छम-छम...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शनिवार, 16 सितंबर 2017

हुल्लड़ मुरादाबादी: भूख, महंगाई, ग़रीबी इश्क़ मुझसे कर रहीं थीं...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 13 सितंबर 2017

ओम प्रकाश आदित्य: ​इतिहास परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 11 सितंबर 2017

हुल्लड़ मुरादाबादी: क़र्ज़ा देता मित्र को वह मूर्ख कहलाए, महामूर्ख वह यार है...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 10 सितंबर 2017
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