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ऐसी कविताएं जो आपको गुदगुदाएं

सूंड फ़ैज़ाबादी: हे मेरे गांव के परमप्रिय कुत्ते

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 21 अगस्त 2017

हे मेरे गांव के परमप्रिय कुत्ते, मुझे देख–देख कर चौंकते रहो।

जैमिनी हरियाणवी: महबूबा-महबूबा, तू मन्नै ले डूबी मैं तन्नै ले डूब्या...

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 17 अगस्त 2017

ओ मेरी महबूबा, महबूबा-महबूबा, तू मन्नै ले डूबी, मैं तन्नै ले डूब्या।

शैल चतुर्वेदी: 40 पार करते ही तुम पर इश्क़ का भूत सवार होगा...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 16 अगस्त 2017

मशहूर हास्य कवि शैल चतुर्वेदी की कविता गुदगुदाती है और हंसने से उम्र तो बढ़ती ही है...

सुरेश उपाध्याय: मेरे अच्छे डैडी मैं सच कह रही हूं, मैं इस लड़के से...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 15 अगस्त 2017

एक नेता के यहां तीन बच्चे अवतरित हुए...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 14 अगस्त 2017

सूंड फ़ैज़ाबादी: मुझे मिल गई ग़रीबी मैंने पूछा...क्या हाल है बड़ी बी?

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शनिवार, 12 अगस्त 2017

हुल्लड़ मुरादाबादी: चांद औरों पर मरेगा, क्या करेगी चांदनी...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 10 अगस्त 2017

ओम प्रकाश आदित्य: ओ घोड़ी पर बैठे दूल्हे क्या हंसता है...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 9 अगस्त 2017

अब हंसता है फिर रोयेगा, शहनाई के स्वर में जब बच्चे चीखेंगे।

अशोक चक्रधर: क्यों नहीं जीते हो, इतनी क्यों पीते हो?

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 8 अगस्त 2017

मैं तो दूसरों से भी अच्छी तरह जीता हूं, सिर्फ़ एक पैग पीता हूं।

जैमिनी हरियाणवी: चूहे तुमको नमस्कार है, चुके नहीं इतना उधार है

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 7 अगस्त 2017

चूहे तुमको नमस्कार है चुके नहीं इतना उधार है, महंगाई की अलग मार है तुम पर बैठे हैं गणेश जी।

अल्हड़ बीकानेरी: असली माखन कहां आजकल ‘शार्टेज’ है भारी...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

सूंड फ़ैज़ाबादी: सांप पर तो भरोसा है हमको मगर, अपने यारों का...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

अल्हड़ बीकानेरी: डाकू नहीं, ठग नहीं, चोर या उचक्का नहीं...

  • काव्य डेस्क / अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 1 अगस्त 2017

बाबू तेरी सियासत ने कमाल कर दिया....

  • विजय जैन, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 28 जुलाई 2017
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