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हाइकु

हमारी पाठक रामकुमारी ने भेजी हाइकु कविता

Ramkumari Karnake

7 कविताएं

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हाइकु कविता 

दोष किसका
सिर्फ मेरे दिल का
या वक्त दोषी

खोई सुबह
शाम बेगानी ख़फा
रात है गुम

उमंग उठी
पुलकित हुई मैं
डर क्यों है

कलम साथी
कागज़ को तरसी
दवाद हिन

- रामकुमारी 

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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