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हाइकु

रक्षक जब बन जाये भक्षक

dinesh chauhan

19 कविताएं

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रक्षक जब
बन जाये भक्षक
क्या करें हम।

उनके घर
रात बच्चे रोये थे
रोटी नहीं थी।

रोटी के बिना
पानी का सहारा ले
सो गए सब।

उनके घर
दीवारें नहीं दिखी
परदे दिखे।

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