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हाइकु जापानी शैली की लघु कविता है। इसमें 17 वर्ण होते हैं और इसे तीन पंक्तियों में लिखा जाता है। पहली पंक्ति में पांच वर्ण, दूसरी में सात, और तीसरी में फिर पांच वर्ण होते हैं।

त्रिलोक सिंह: संसार ऐसा, जैसा तुम बोओगे, उगेगा वैसा

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शनिवार, 12 अगस्त 2017

वही है बुद्ध जीत लिया जिसने जीवन युद्ध, शिखरों तक किसको पहुंचाया बैसाखियों ने !

कुंवर दिनेश: डगर सूनी, जी बहलाने आयी, हवा बातूनी

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 10 अगस्त 2017

डगर सूनी, जी बहलाने आयी, हवा बातूनी

रमा द्विवेदी: सर्दी की मार, अमीर कैसे जाने, गरीब जाने

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 9 अगस्त 2017

सर्दी की मार, अमीर कैसे जाने, गरीब जाने, धरा सहमी, सूरज भी दुबका, ठण्ड को देख।

जेन्नी शबनम: तौल सके जो, मां की ममता, नहीं कोई तराजू

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 6 अगस्त 2017

जगदीश व्योम: सूर्य के पांव, चूमकर सो गए, गांव के गांव

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’: भीगीं पलकें, छूती गोरा मुखड़ा, तेरी अलकें

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 2 अगस्त 2017

गोपाल दास नीरज: मेरी जवानी, कटे हुये पंखों की, एक निशानी

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 27 जुलाई 2017

सीमा 'असीम' सक्सेना: सूखे गुलाब रखे, जो डायरी में, मन में हरे

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017

सूखे गुलाब रखे, जो डायरी में, मन में हरे, नदी किनारे,हाथों में हाथ डाले चलते रहे।

धीरा खंडेलवाल: सांसें लू भरी, नीर भरे बदरा, चैन बिखरा

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017

'हाइकु' विश्व की सबसे संक्षिप्त काव्य रचना है, लेकिन इसका मर्म बेहद गहरा और रहस्यमयी होता है। रचनाकान केवल शुरू करता है पूरा उसे श्रोता करता है।

कहीं न कहीं, हम सब बेचारे, दर्द के मारे

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 29 जून 2017

नींद खुमारी, सिरहाना न मिला, पत्थर सही।

मसल नैन, सुबह की चौखट, जागती रैन

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 29 जून 2017
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