आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

Home›  kavya›  Haiku

हाइकु जापानी शैली की लघु कविता है। इसमें 17 वर्ण होते हैं और इसे तीन पंक्तियों में लिखा जाता है। पहली पंक्ति में पांच वर्ण, दूसरी में सात, और तीसरी में फिर पांच वर्ण होते हैं।

त्रिलोक सिंह: इच्छाएं तट, ज़िन्दगी एक नदी, आशा की नाव

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 10 सितंबर 2017

वही है बुद्ध जीत लिया जिसने जीवन युद्ध, शिखरों तक किसको पहुंचाया बैसाखियों ने !

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’: चरण छूना, नस-नस में जैसे, प्रेम जगाना

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 7 सितंबर 2017

प्यार का कर्ज़ लगता कम पर चुकता नहीं, ये स्कूली बच्चे बिन परों के पाखी उड़ते रहें।

गोपाल दास नीरज: वो हैं अकेले, दूर खड़े होकर, देखें जो मेले 

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • रविवार, 27 अगस्त 2017

मेरी जवानी कटे हुये पंखों की एक निशानी, जन्म मरण समय की गति के , हैं दो चरण 

जेन्नी शबनम: सूरज लाल, सागर में उतरा, देखने हाल

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शनिवार, 26 अगस्त 2017

कुंवर दिनेश: डगर सूनी, जी बहलाने आयी, हवा बातूनी

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 22 अगस्त 2017

सुधा गुप्ता: कहीं न कहीं, हम सब बेचारे, दर्द के मारे

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • सोमवार, 21 अगस्त 2017

रमा द्विवेदी: सर्दी की मार, अमीर कैसे जाने, गरीब जाने

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 9 अगस्त 2017

जगदीश व्योम: सूर्य के पांव, चूमकर सो गए, गांव के गांव

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

सूर्य के पांव चूमकर सो गए गांव के गांव, यूं ही न बहो पर्वत–सा ठहरो मन की कहो।

सीमा 'असीम' सक्सेना: सूखे गुलाब रखे, जो डायरी में, मन में हरे

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • बुधवार, 26 जुलाई 2017

सूखे गुलाब रखे, जो डायरी में, मन में हरे, नदी किनारे,हाथों में हाथ डाले चलते रहे।

धीरा खंडेलवाल: सांसें लू भरी, नीर भरे बदरा, चैन बिखरा

  • काव्य डेस्क, नई दिल्ली
  • मंगलवार, 25 जुलाई 2017

'हाइकु' विश्व की सबसे संक्षिप्त काव्य रचना है, लेकिन इसका मर्म बेहद गहरा और रहस्यमयी होता है। रचनाकान केवल शुरू करता है पूरा उसे श्रोता करता है।

मसल नैन, सुबह की चौखट, जागती रैन

  • काव्य डेस्क-अमर उजाला, नई दिल्ली
  • गुरुवार, 29 जून 2017
पाठकों के द्वारा भेजे गए
अन्य
Top
Your Story has been saved!