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man mukur:  a classic views on feeling by dheera khandelwal

इस हफ्ते की किताब

मन मुकुरः मन की व्य‌था को पूरे शिद्दत से दर्शाती है यह पुस्तक 

शरद मिश्र/ अमर उजाला नई दिल्‍ली

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मन मुकुर हाइकु संग्रह में धीरा खंडेलवाल ने मन की व्य‌था को जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ बांधते हुए एक मर्मस्पर्शी प्रयास किया है। दुख, विपदा, गरीबी, मजबूरी, संयोग, प्रकृति, प्यार, समर्पण, साथ, विरह, अलगाव, विषमता, साहस, सौंदर्य शायद सभी कुछ इसमें एक गहरा एहसास लिए हुए समाए हुए हैं।

संग्रह मन के दर्पण में उभरे बिंबों और प्रतिबिंबों का एक सटीक संयोजन कहा जा सकता है। दर्पण कभी झूठ नहीं बोलता और मन का दर्पण तो सौ फीसदी खालिस होता है। लिहाजा मन मुकुर में हाइकु के काव्य प्रतीकों में युगों का यथार्थ पूरी संपूर्णता और सरलता के साथ पेश होता है।

हाइकु रचियता के मन की पारदर्शिता को स्पष्ट सामने रखते हैं और जीवन को अंत में आशाओं के बयार में बहने के लिए छोड़ देते हैं। धीरा खंडेलवाल ने अपने नाम के अनुरूप हाइकु में धीर गंभीर होकर सरल शब्दों का चयन किया है। वह तर्कसंगत होते हुए विषयों की प्रासंगिकता को अंत तक बनाए रखती हैं। जीवन में आने वाली कठिनाई को एक चुनौती समझ कारवां आगे बढ़ाने का जो संदेश तीन-तीन लाइनों के मारक माधुर्य काव्य में सजाया गया है, वह प्रशंसनीय है। इसमें लोकतंत्र, चुनाव, बहुमत, सरकार और सत्ता को भी परिभाषित किया गया है। 

प्रशासनिक सेवा में कार्यरत खंडेलवाल को विकास में सहायक अहम तथ्यों और बाधा पहुंचाने वाले कारकों का भलिभांति अनुभव है। धीरा खंडेलवाल ने काव्य में इसे सहजता से पेश किया है। परिवार के सामाजिक मूल्यों को प्रमुखता दी गई है। 

मनुष्य के मन में साहस और परिश्रम का संचार करने के लिए सभी तरह के मानकों का उपयोग किताब को एक प्रेरणास्पद काव्य का दर्जा देता है। किताब के हाइकु को पढ़कर लगता है कि मन मुकुर लिखने के लिए धीरा ने पूरे समर्पण भाव से लेखन किया है। यह काव्य संग्रह भविष्य में कविता के एहसास को लोगों के मन मस्तिष्क में और बढ़ाने में कामयाब होगा। भावों की जो बानगी किताब में पेश की गई है, वह हाइकु को जन मानस में और लोकप्रिय करने में मददगार होगी। 

किताब में वहीं सब कुछ है जो शायद धीरा ने अपने आस-पास के जीवन में देखा होगा। धीरा खुद कहती हैं कि इसे लिखने के लिए मुझे आम जीवन से प्ररेणा मिली है। जो आस-पास देखा वही लिखा। हाइकु की संक्षिप्त पंक्तियां बताती हैं कि जीवन कैसा है। इसमें अभाव और भाव के बीच कितनी दरमियां है। संपन्नता के साथ शांति सबसे अहम है। कोलाहल मन को व्यथित करता है। इससे और कुछ हासिल नहीं होने वाला। आशा और उम्मीद से आप जीवन को एक शांत और धैर्य भरा मन दे सकते हैं, जो सारी समस्याओं का एक बेहतर समाधान हो सकता है। धीरा खंडेलवाल शायद इन्हीं लक्ष्यों के साथ इस किताब में सच का संधान करती हैं। उम्मीद है यह संग्रह पाठकों के मन में असीम ऊर्जा का संचार करेगा। 


 
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