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book review of Rishiyon ke desh me written by ashok panday

इस हफ्ते की किताब

हम कहां थे और अब कहां पहुंच गए हैं...

मनोरंजन डेस्क/ अमर उजाला

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'ऋषियों के देश में' कवि अशोक पाण्डेय 'अनहद' की पांचवीं काव्यकृति है, जो घनाक्षरी छंदों में है। वर्तमान सामाजिक, राष्ट्रीय, पारिवारिक, पर्यावरणीय क्षरण और मानवमात्र में बढ़ रही दुष्प्रवृत्तियों, भारतीय स्वर्णिम इतिहास से वर्तमान का भटकाव, पीढ़ियों की अध्यात्म से अरुचि आदि अत्यंत ज्वलंत विषयों को कवि श्री 'अनहद' ने अत्यंत सूक्ष्मता एवं सहजता से अपनी कविता का विषय बनने दिया है।

'ऋषियों के देश में' अर्थात् भारत को वैश्विक पटल पर विश्व गुरु का सम्मान प्राप्त था, किंतु विपरीत परिस्थितियों से कवि व्यथित है। हम कहां थे और अब कहां पहुंच गए हैं, ऐसे सवाल इस पुस्तक के केंद्र हैं।

पुस्तक का सार इन्ही तथ्यों को रेखांकित करता है। पुस्तक भाव और शिल्प के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण और पठनीय है। लय पाठकों को बांध कर रखता है और शब्दों का चयन प्रभावित करता है।

किताब- 'ऋषियों के देश में' 
कवि-अशोक पाण्डेय 'अनहद'
प्रकाशक-अवध भारती प्रकाशन, उत्तर प्रदेश
मूल्य-200 रुपये

साभार: मनोरंजन डेस्क/ अमर उजाला
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