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a book from which school going light will be illuminated  

इस हफ्ते की किताब

स्कूल चलें हम: मतलब शिक्षा से चहुंओर उजियारा 

शरद मिश्र, नई दिल्‍ली

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पत्रकारिता और स्वतंत्र लेखन के जरिए अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरने वाले हेमंत स्नेही ने स्कूल चले हम शीर्षक से किताब लिखकर मानव समाज में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने साफ कहा है कि बच्चों में संपूर्ण विकास करने वाली जीवन की सबसे अहम विधा शिक्षा है। उन्होंने किताब में बदलते परिवेश में शिक्षा के शाश्वत महत्व को छोटी-छोटी कविताओं के माध्यम से उजागर किया है। देश, काल, वातावरण तथा समाज के लिए शिक्षा को उन्होंने बेहद अहम अंग माना है। बदलते परिवेश में शिक्षा को ही सबसे मुख्य कला मानने वाले स्नेही ने शहरों के अलावा गांवों में भी शिक्षा का अलख जगाने की बात कही है। 

विचारकों ने कहा है कि अगर किसी देश को तरक्की के पथ में ले जाना है तो वहां के बच्चों को सबसे पहले बेहतर ‌शिक्षा प्रदान करनी होगी। हेमंत स्नेही किताब में विभिन्न पंक्तियों के माध्यम से कहते हैं कि अगर जीवन में अंधियारा भगाना है तो हमें शिक्षा या ज्ञान रूपी दीपक जलाना ही होगा। वह बेटियों की शिक्षा को तो इन सब प्रयासों में सबसे ज्यादा अहम मानते हैं। वह कहते हैं कि देश में पुरातन  समय में बेटियों को बोझ मानकर उन्हें शिक्षा से दूर रखने का प्रयास होता आया है। आधुनिक युग में अब बच्चियों को उनके अभिभावक शिक्षा दिलाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। स्नेही इसे ही रेखांकित करते हुए किताब में लड़के और लड़कियों को एक समान मानकर दोनों को स्कूल भेजने  के लिए लालायित दिखते हैं। 

पत्रकारिता के पेशे में जीवन के उतार-चढ़ाव को बड़े नजदीक से देखने वाले स्नेही ने अपने स्वतंत्र लेखन काल में बालोपयोगी कविताओं को लिखने में गंभीरता से प्रयास किया है। ‌किताब में उनके बाल स‌ाहित्य प्रतिभा की मनोरम छटा बिखेरी गई है। बाल साहित्य से जुड़े होने की वजह से स्नेही ने किताब के मुख्य विषय और कथन के साथ पूरी तरह न्याय किया है। 

स्नेही की इस किताब में बताया गया है कि किसी भी बच्चे के जीवन में परिवार उसकी पहली पाठशाला है। मां उसकी पहली शिक्षक होती है। बच्चों को अच्छे संस्कार देने का दायित्व सबसे पहले मां-पिता को है। किताब इंगित करती है कि जीवन में नैतिक शिक्षा के अलावा औपचारिक शिक्षा की भी विशेष भूमिका होती है। भूमंडलीकरण के इस दौर में औपचारिक शिक्षा का महत्व और भी बढ़ता जा रहा है। स्नेही स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि अगर बच्चों को स्कूल की ओर नहीं ले जाया गया तो जीवन में उनके लिए‌ किसी भी दीपक से प्रकाश उपलब्‍ध नहीं कराया जा सकता। 

किताब में लड़कियों की शिक्षा को जीवन की एक महती आवश्यकता बताया गया है। स्नेही जी किताब की कविताओं के माध्यम से कहते हैं कि सिर्फ शिक्षा देना ही मां-पिता का कर्त्तव्य नहीं होता। अभिभावकों को यह देखना होगा कि बच्चे सुशिक्षित होकर संस्कारवान भी हो, ताकि वह निकट भविष्य में अपने आस-पास के अलावा देश और विश्व के लिए भी उपयोगी हो सके। बच्चे देश और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझे त‌था अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हों। 

पद्य में कही गई बात गद्य के मुकाबले कही अधिक असरदायी होती है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए स्नेही ने जो अनुपम प्रयास किया है वह काबिले तारीफ है। स्नेही जी ने शिक्षा के अलावा देश, देशभक्ति, प्रेम, सदाचार, सत्य, अहिंसा, मानवता, देश सेवा, राष्ट्रध्वज, गणतंत्र, स्वतंत्रता, दुनिया, शक्ति, महाशक्ति, खेलकूद, पर्यावरण, स्वास्‍थ्य, जल संरक्षण, शिक्षक, स्वच्छता, नारी शक्ति, धार्मिक पर्व, राष्ट्रीय पर्व आदि विषयों के महत्व पर भी प्रकाश डाला है। स्नेही जी की राय है कि अपनी शिक्षा को सफल करने के लिए आपको इन सब तथ्यों को मन मस्तिष्क में उम्र भर सहेज कर रखना होगा। 

लेखक-हेमंत स्नेही 
प्रकाशक- चिल्ड्रन बुक टेंपल, दिल्ली
मूल्य- 300 रुपए 







 
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