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amar ujala baithak writer chitra mudgal and maitreyi pushpa discuss women issues

हलचल

फॉर्मूला लेखन से नारी मुक्ति नहीं हो सकती

अमर उजाला, बैठक

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मशहूर साहित्यकार चित्रा मुदगल का मानना है कि साहित्य में स्त्री विमर्श के नाम पर जो लिखा जा रहा है, वह स्त्री विमर्श है ही नहीं। इसने तो स्त्री विमर्श को एक खांचे में सीमित कर दिया है। वहीं, मशहूर कहानीकार मैत्रेयी पुष्पा का मानना है कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद सत्री को समाज में बराबरी का दर्जा नहीं मिल पाया है। जो बराबरी दिखती है, वह दिखावा भर है। 

चित्रा एवं मैत्रेयी में यह ऐतिहासिक जुगलबंदी हपुई मंगलवार को अमर उजाला की चर्चित साहित्यिक पहल बैठक में। दोनों ने स्त्री-विमर्श, रचनाधर्मिता, विरोधाभास, साम्यता और लेखन पर चर्चा की। कई जाने-अनजाने पहलुओं पर भी बात हुई। अपने और दूसरों के लिखने के मायने भी समझाए। यह अमर उजाला बैठक की तीसरी जुगलबंदी थी। आगे पढ़ें

देह की मुक्ति सब कुछ नहींः चित्रा

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