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एलओसी के दोनों ओर बढ़े लोगों का आवागमन

जम्मू/ब्यूरो

Updated Mon, 17 Dec 2012 04:02 PM IST
movement of people should increase on both sides of LoC
तीन दिवसीय ‘क्रॉस एलओसी सिविल सोसाइटी डायलॉग’ के दौरान तमाम वक्ता इस बात पर एकमत हुए कि लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के दोनों ओर रहने वाले कश्मीरियों को एक-दूसरे के क्षेत्र में जाने, सामान ले जाने और अन्य सेवाएं मुहैया करवाने पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
साथ ही स्कार्दू-कारगिल, तुरतुक-खापलुक, जंगार-कोटली और ज्योड़िया-बिंगबर जैसे परंपरागत क्रासिंग मार्गों को खोलना समय की जरूरत है। सेंटर फार डायलॉग एंड रिकान्सिलेशन (सीडीआर) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के प्रयासों का स्वागत किया।

उनका मानना है कि बातचीत की प्रक्रिया में कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान ही मुख्य केंद्र बिंदु होना चाहिए और वह भी निर्धारित समय सीमा के अंदर हो। इस डायलॉग के आधार पर निकाले गए नतीजों के अनुसार दोनों देशों के बीच वीजा पॉलिसी को उदार बनाने के फैसले का स्वागत किया गया और दोनों देशों से अपील की गई कि इसे जम्मू-कश्मीर के स्टेट सब्जेक्ट तक बढ़ाया जाना चाहिए।

इस प्रक्रिया के तहत तीन मुख्य हितधारक हैं। भारत, पाकिस्तान और एलओसी के दोनों ओर रहने वाले नागरिक। जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक राय के विचलन को आम सहमति से दूर किया जा सकता है और इसे प्राथमिकता के साथ प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। तमाम विस्थापित लोगों के पुनर्वास को तत्काल निपटाया जाना चाहिए। खासकर 1989 के बाद विस्थापन को मजबूर किए गए लोगों को विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

वक्ताओं ने दोनों ओर की सरकारों से अपील की कि मानवाधिकार, नागरिक अधिकार, सहिष्णुता की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रयास करने चाहिए। साथ ही मानवाधिकार उल्लंघन के पीड़ितों को तत्काल न्याय दिलाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। दोनों ओर के कलाकारों, लेखकों, छात्रों और शोधकर्ताओं को सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए स्पेशल क्रास एलओसी परमिट प्रदान किया जाना चाहिए।

एलओसी पर किताबों, पत्रिकाओं और समाचार पत्रों का आदान-प्रदान सुगम बनाया जाना चाहिए। साथ ही भारत और पाकिस्तान की सरकारों से आग्रह करते हैं कि एलओसी के दोनों ओर टीवी चैनलों के प्रसारण पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए। साथ ही संचार सुविधा के लिए चैनल स्थापित किए जाएं।

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