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राज्य में 165 दवाई की अवैध दुकानें सीज

Jammu

Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
जम्मू। ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गनाइजेशन ने रियासत में अवैध रूप से चल रही 165 दवाइयों की दुकानों को सीज किया है। ऐसे सभी दुकानदारों से दवाइयां जब्त की गई हैं। इनमें कश्मीर डिवीजन में 143 और जम्मू डिवीजन में 22 ऐसी दुकानें बंद करवाई गई हैं। मजेदार बात यह है कि बिना लाइसेंस लिए अवैध तरीके से चल रही इन दवाईखानों को चलाने में अधिकांश स्वास्थ्य विभाग के मुलाजिम हैं। ड्रग कंट्रोलर सतीश गुप्ता का कहना है कि ऐसी अवैध दवाइयों को सीज करने के बाद कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान को भविष्य में भी जारी रखा जाएगा।
विभाग की टीमों ने कश्मीर और जम्मू डिवीजन में कई जगह दबिश देकर दवाई विक्रेताओं के लाइसेंस चेक किए। ऐसी जानकारी मिली थी कि दोनों डिवीजनों में कई लोग अपने स्तर पर ही बिना लाइसेंस लिए दवाइयों की बिक्री कर रहे हैं। इनमें कश्मीर डिवीजन के अधिकांश जिलों में ऐसी अवैध दुकानें धड़ल्ले से चलती हुई पाई गईं। मुनाफे के लिए चलाई जा रही ऐसी दुकानों से बिक्री की जा रही दवाइयों से आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। इनमें स्थानीय स्तर की दवाइयां ज्यादा मुहैया करवाई जाती हैं। कश्मीर में सौ से ज्यादा रिटेल में चल रही ऐसी अवैध दुकानों से सभी दवाइयां जब्त की गईं। विभाग की इस कार्रवाई से साफ हो गया है कि रियासत में दवाइयों के नाम पर अवैध धंधा जोर पकड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि मापदंडों पर जम्मू डिवीजन में 4000 से ज्यादा रिटेल और 1300 से ज्यादा होलसेल दवाइयों के काउंटर चल रहे हैं। जबकि इसके अलावा कई दर्जनों ऐसे सेंटर भी हैं, जो अवैध ढंग से चल रहे हैं। जम्मू संभाग की बात करें तो कठुआ सेक्टर में पंजाब से सटे इलाकों से एजेंट आकर यहां इस अवैध धंधे को कर रहे हैं। इनमें अधिकांश मामलों में किराये की दुकानों का सहारा लिया जाता है। यही नहीं कई एजेंट पंजाब से सुबह आकर विभिन्न स्थानों पर इस तरह दवाइयों की बिक्री करके शाम को वापस पंजाब के इलाकों में लौट जाते हैं। वर्ष 2008-09 तक ड्रग कंट्रोल आर्गनाइजेशन ने रियासत में 121 ऐसी अवैध दुकानों को सीज किया। इनमें श्रीनगर संभाग के विभिन्न इलाकों में ही 115 दुकानें सीज कई गईं, जबकि बाकी जम्मू संभाग में। इसी तरह वर्ष 2009-10 में कुल 125 दुकानों में 111 श्रीनगर डिवीजन में ही सीज की गई। जबकि 14 दुकानें जम्मू संभाग में की गईं। वर्ष 2010-11 में भी राज्य में ऐसी कई अवैध दुकानें सीज की गईं।
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