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केमिस्ट शाप पर लुट रहे मरीज-तीमारदार

Jammu

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
जम्मू। केमिस्ट शापों पर मरीजों को मांग के विपरीत दवाई के पूरे स्ट्रिप खरीदने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। डाक्टर के अगर किसी मरीज को पांच दिन की दवाई के लिए लिखा जाता है, लेकिन बाजार में उन्हें पांच के बजाय पूरी दस टेबलेट की स्टिप लेने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे मरीजों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। इसमें निर्धारित कोर्स के बाद उन्हें बची दवाई का कोई फायदा नहीं मिलता है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस अव्यवस्था को लेकर ड्रग एंड फूड कंट्रोल आर्गनाइजेशन और दवाई विक्रेताओं का अलग-अलग तर्क है।
उल्लेखनीय है कि रियासत में करीब 14000 केमिस्ट शाप चल रही हैं। इसमें हजारों कंपनियों की दवाइयां उपलब्ध हैं, लेकिन मरीजों और तीमारदारों की शिकायतें बढ़ रही हैं कि जब भी दवाई विक्रेता से दो या तीन दिन की कोई दवाई की मांग की जाती है तो उन्हें पूरा स्ट्रिप लेने के लिए दबाव बनाया जाता है। पूरा स्ट्रिप लेने से मरीजों और तीमारदारों की जेब का भी नुकसान होता है। यही नहीं खरीदी गई दवाई भी किसी का की नहीं रह जाती। 
इसमें उनका तर्क रहता है कि बची हुई दवाई उनके काम नहीं आएगी। इससे इलाज पाने के लिए मरीज को मजबूरन पूरी स्ट्रिप खरीदनी पड़ती है। यह व्यवस्था ज्यादातर महंगी दवाइयों पर लागू रहती है। जीएमसी में मरीज के साथ आए तीमारदार रोहित बख्शी ने बताया कि उन्हें इन्फेक्शन से संबंधित एक दवाई को सिर्फ पांच दिन के लिए खाने को बोला गया, लेकिन जब वह दुकानदार के पास गए तो उन्हें पूरा स्ट्रिप लेने के लिए मजबूर किया गया, जबकि उन्हें बाकी की दवाई की कोई जरूरत नहीं थी। ड्रग कंट्रोलर सतीश गुप्ता का कहना है कि दवाई विक्रेताओं को ऐसे कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। अगर बाजार में ऐसी परिस्थितियां हैं तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। जेके केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के आयोजक सचिव गुरमीत सिंह का कहना है कि कुछ दवाइयों पर कंपनियों द्वारा एक तरफ नाम और दूसरी तरफ मैन्युफैक्चर डेट छापी गई होती है, जिससे स्ट्रिप को एक तरफ से निकालने पर दवाई के नाम के बारे और उसकी एक्सपायरी डेट के बारे में पता नहीं चल पाता है।
इससे ही कुछ दवाइयों को मरीजों को पूरा देना उनकी भी मजबूरी है। उनके अनुसार अधिकांश कंपनियों द्वारा अब स्ट्रिप पर एक तरफ नाम और दूसरी तरफ एक्सपायरी और मैन्युफैक्चर डेट छापकर भेजी जा रही है। इस व्यवस्था को केंद्र सरकार को देखना चाहिए।
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