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दिलों को मिलाना और भेदभाव मिटाना लक्ष्य

Jammu

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
जम्मू। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने स्थानीय अवाम के समक्ष अपनी पार्टी को सत्ताधारी दलों के विकल्प के रूप में पेश किया। मुफ्ती ने अस्सी के दशक में हुए विधानसभा चुनाव में धांधली की वजह से मुसलिम यूनाइटेड फ्रंट की पराजय को आतंकवाद की बुनियाद करार दिया। पीडीपी नेता ने कश्मीर समस्या का समाधान अवाम में विश्वास बहाली बताते हुए कहा कि खजाना लुटाने से बात नहीं बनने बनेगी। आजादी के बाद से जारी अब तक यह तजुर्बा नाकामयाब साबित हुआ है। मुफ्ती ने रविवार को जम्मू कश्मीर अमन की ओर विषय पर आयोजित वार्तालाप के दौरान खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। इस वार्तालाप का आयोजन पीडीपी के युवा विंग के नेता कुलजीत सिंह जम्वाल ने किया था।
मुफ्ती मोहम्मद सईद ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य रियासत में क्षेत्रीय स्तर पर अवाम के दिलों को मिलाना और भेदभाव मिटाना है। रियासत में पीडीपी के शासनकाल के दौरान जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को अपना हक मिला था। कश्मीर समस्या की तरफ इशारा करते हुए मुफ्ती ने इसकी वजह अवाम में अविश्वास की भावना बताई। इसके लिए मुफ्ती ने लोगों नहीं, उन लीडरों को कसूरवार ठहराया, जो अपनी जुबान पर कायम नहीं रहे। जरूरत इस अविश्वास को विश्वास में बदलने की है, यह खजाना लुटाने से संभव नहीं। पीडीपी ने अपने शासनकाल के दौरान अवाम के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया। इसके सकारात्मक नतीजे सामने आए और रियासत में अमन बहाली के दौर का आगाज हुआ था। बकौल मुफ्ती कश्मीर में कुशासन का नतीजा पहले सीधे देश के खिलाफ जाता था, इसकी वजह कश्मीर में कोई सियासी विकल्प नहीं होना था। अब पीडीपी सभी के सामने है। उन्होंने अनुच्छेद 370 को भी रियासत और देश के बीच एक पुल करार देते हुए इसे कायम रखने की वकालत की। मुफ्ती ने कहा कि रियासत में पीओके रिफ्यूजियों की वन सेटलमेंट के लिए पुख्ता पालिसी बने। इसके अलावा वेस्ट पाकिस्तानी रिफ्यूजियों को स्थायी नागरिकता देने के लिए समन्वय के साथ काम किया जाए। आरटीआई को कमजोर बनाए जाने पर मुफ्ती ने कहा कि आगामी विधानसभा के सत्र में पीडीपी विधायक इस मुद्दे को उठाएंगे। इस मौके पर पूर्व मंत्री दिलावर मीर, पूर्व मंत्री सरदार रंगील सिंह, विधायक शांति देवी, फलैल सिंह, चौधरी हुसैन बफा आदि पीडीपी के सीनियर नेता और सिविल सोसायटी के सदस्य मौजूद थे।
अमरनाथ की जमीन का फैसला नहीं लिया
मुफ्ती मोहम्मद सईद ने साफ कर दिया कि बाबा अमरनाथ भूमि विवाद संबंधी कोई भी फैसला उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए नहीं लिया। बतौर सीएम भी उनके पास प्रस्ताव आया था, लेकिन उन्हाेंने इसे खारिज कर दिया। सोनामर्ग से लेकर आगे तक हजारों कनाल जमीन पड़ी है। सिर्फ दो हजार कनाल ही क्यों, सारी जमीन को पहले की तरह इस्तेमाल लोग अब भी करें, कर भी रहे हैं। किसी को कोई दिक्कत नहीं।
वाजपेयी ने किया था निष्पक्ष चुनाव का वादा
वर्ष 2002 से पूर्व उनके साथी कहते थे कि कैसे चुनाव लड़ेंगे। रियासत में हुर्रियत चुनाव नहीं जीत सकती, तो पीडीपी कैसे। मुफ्ती के मुताबिक उन्होंने उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से बातचीत की। वाजपेयी ने लाल किले से 15 अगस्त 2001 को रियासत में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने का एलान किया था। वह सही साबित हुआ। 2002 के विधानसभा चुनाव में उमर अब्दुल्ला गांदरबल से पीडीपी उम्मीदवार काजी अफजल से हारे थे।
कांग्रेस में रहते विकल्प नहीं बन सका
दशकों तक कांग्रेस में सियासत करने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि वह रियासत में पार्टी को 1975 के बाद एक सशक्त विकल्प नहीं बना सके। इसके लिए उन्हाेंने कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि जब भी माहौल बना, उन्हें आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी गई। फिर उन्हें दिल्ली की सियासत में उलझा दिया गया। एक जमाना वह आ गया, जब कश्मीर में लोग कहने लगे हमें कांग्रेसी सड़क नहीं चाहिए। जीएम शाह को सत्ता में इसलिए लाए कि कांग्रेस आएगी, फिर राजीव और फारूक समझौता हो गया। फिर वह जनता दल में गए और बाद में पीडीपी बनाई।
रियासती अवाम का हीरो बनने के बावजूद शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को जेल जाना पड़ा। रिहाई के बाद शेख ने ही रायशुमारी के एजेंडे को खारिज करते हुए फजूल की एक्सरसाइज करार दिया था। जब साउथ एशिया जल रहा था तो गांधी को इसी कश्मीर में रोशनी की किरण नजर आई थी, लेकिन अवाम में अविश्वास की वजह से ही ऐसे हालात पैदा हुए थे। हालांकि मुसलिम कान्फ्रेंस से ही बदल कर नेशनल कान्फ्रेंस का गठन हुआ था।
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