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सौ साल बाद आई डा. वाडिया की याद

Jammu

Updated Fri, 21 Sep 2012 12:00 PM IST
जम्मू। लगभग सौ साल के बाद ही सही, आखिरकार भारतीय भूगर्भ विज्ञान के पिता कहे जाने वाले डा. डीएन वाडिया की याद उच्च शिक्षा और विज्ञान से जुड़े लोगों को आ ही गई। विश्व प्रसिद्ध जियोलॉजिस्ट डा. वाडिया को शहर में वह सम्मान मिलने जा रहा है, जिसके वह दशकों से हकदार थे। डा. वाडिया को यह सम्मान जम्मू विश्वविद्यालय वाडिया म्यूजियम आफ नेचुरल हिस्ट्री का निर्माण करके दे रहा है। म्यूजियम के बाहर डा. वाडिया की मूर्ति भी लगाई जाएगी, जिसको तैयार करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। अगले कुछ सप्ताह में म्यूजियम तैयार होगा।
डा. वाडिया की याद में विवि में म्यूजियम के निर्माण का सपना तत्कालीन कुलपति प्रो. अमिताभ मट्टू ने सन 2004-05 में देखा था, जबकि इसका नाम पूर्व कुलपति प्रो. वरुण साहनी ने रखा। प्रो. मट्टू ने म्यूजियम के लिए तब काम शुरू करने को कहा, जब वह जियोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनी को देखने के लिए पहुंचे थे। जिस समय म्यूजियम को बनाने की योजना बनी, उस समय प्रो. जीवीआर प्रसाद विभाग के एचओडी थे। इसके लिए डिस्टेंस एजूकेशन निदेशालय के सामने बिल्डिंग बनाई गई है। विवि के जियोलॉजी विभाग के एचओडी प्रो. जीएम भट्ट के अनुसार म्यूजियम में फिलहाल जियोलॉजी विभाग के म्यूजियम में रखी दुर्लभ चीजों को रखा जाएगा।

साइंस कालेज में पढ़ा चुके हैं डा. वाडिया
जम्मू। पढ़ाई पूरी करने के बाद डा. वाडिया ने दो जुलाई 1907 में प्रिंस आफ वेल्स (अब साइंस कालेज) को ज्वाइन किया था। डा. वाडिया की कालेज में होने वाली पहली नियुक्ति थी। उनकी ही देखरेख में जियोलॉजी का पहला बैच सन 1907 (एफए) में शुरू हुआ जो सन 1913 में पीजी (लाहौर विवि से मान्यता प्राप्त) करके बाहर निकला। डा. वाडिया कालेज में अंग्रेजी और जियोलॉजी पढ़ाते थे। आज भी कालेज में उनके संग्रह के अलावा उनके द्वारा इस्तेमाल किया गया टेबल और कुर्सी मौजूद हैं। केवल यही नहीं, सन 1919 में उनकी प्रसिद्ध किताब जियोलॉजी आफ इंडिया (मैकग्राहिल पब्लिकेशन, लंदन) भी उस समय प्रकाशित हुई, जब वह जम्मू में थे। छात्रों में जियालॉजी के प्रति उत्साह बढ़ाने के लिए डा. वाडिया हर शनिवार और रविवार को छात्रों के साथ फील्ड ट्रिप पर निकल जाते थे और अवशेषों का संग्रह करते थे। वह सन 1921 तक साइंस कालेज के साथ जुडे़ रहे।

किसी से हासिल नहीं की थी शिक्षा
जम्मू। सूरत में पैदा हुए डा. वाडिया ने स्नातक के बाद भूगर्भ में पीजी की। मजे की बात यह है कि उन्होंने किसी से भूगर्भ की शिक्षा हासिल नहीं की, बल्कि उन्होंने इसकी पढ़ाई खुद की। डा. वाडिया प्रिंस आफ वेल्स के इंचार्ज प्रिंसिपल भी रह चुके हैं। उनकी किताब जियोलॉजी आफ इंडिया को पढ़े बिना कोई भी जियोलॉजी की पढ़ाई पूरी नहीं कर सकता है। उनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके जीवन में ही देहरादून में वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियालॉजी की स्थापना कर दी गई थी।
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