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सात वर्षों से माडल स्कूल का सपना अधूरा

Udhampur

Updated Thu, 06 Dec 2012 05:30 AM IST
उधमपुर। करीब सात वर्ष पहले रामनगर तहसील के चनुनता गांव के विद्यार्थियों को सरकार की तरफ से हायर सेकेंडरी स्तर की शिक्षा के लिए माडल स्कूल का सपना दिखाया गया था, लेकिन वह सपना आज तक पूरा नहीं हो पाया है।
सरकार द्वारा हायर सेकेंडरी स्कूल चनुनता के लिए एक करोड़ की लागत से दो मंजिला इमारत का निर्माण किया जाना था। इसके लिए एक करोड़ की राशि को मंजूर भी किया गया। काम शुरू भी हो गया, लेकिन समय पर फंड न मिलने के कारण सात वर्ष बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। जबकि हायर सेकेंडरी स्कूल के विद्यार्थी आज भी क्षतिग्रस्त पांच कमरों की इमारत में शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।
वर्ष 2004 में सरकार ने चनुनता गांव के हायर सेकेंडरी स्कूल को माडल हायर सेकेंडरी स्कूल बनाने के लिए चुना
था। इसका सबसे बड़ा कारण इस स्कूल के पांच कमरों की इमारत में शिक्षा हासिल करना था। माडल स्कूल बनाने के लिए सरकार की तरफ दो मंजिला इमारत का निर्माण करने के लिए मंजूरी दी गई। इस इमारत में ब्लाक ए और ब्लाक बी का निर्माण किया जाना था। 2005 में शिक्षा विभाग की देखरेख में इमारत का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया, लेकिन अभी 10 प्रतिशत ही काम हुआ था कि अचानक काम बंद कर दिया गया। करीब सात वर्ष तक काम बंद रहा। सात वर्ष काम बंद रहने के बाद 2012 में कुछ महीने पहले इसका निर्माण कार्य शुरू किया गया है, लेकिन काम की स्थिति को देख कर यही लग रहा है कि माडल स्कूल की इमारत को पूरा होने में कुछ वर्ष और इंतजार करना पड़ेगा।

खुले आसमान के नीचे बैठते प्रिंसिपल
इमारत नहीं होने के कारण स्कूल के 332 विद्यार्थी मात्र पांच कमरों की इमारत में मुश्किल से शिक्षा हासिल कर रहे हैं। इतने कमरों में 12 कक्षाएं चल रही हैं। हालात यह है कि स्कूल के प्रिंसिपल को अपना कार्यालय खुले आसमान के नीचे चलाना पड़ता है। शिक्षकों के बैठने के लिए भी कोई कमरा नहीं है। बारिश दिनों में परेशानी दोगुनी हो जाती है।

फंड की कमी पड़ी
एजूकेशन प्लानिंग आफिसर वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि समय पर फंड नहीं मिलने के कारण ही आज तक माडल स्कूल की इमारत का निर्माण नहीं हो पाया है। सात वर्ष के दौरान निर्माण सामग्री काफी महंगी हो चुकी है। इसलिए प्रोजेक्ट की लागत दो गुनी हो गई है। अब दो करोड़ की लागत से माडल इमारत का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्राउंड फ्लोर के बनते ही स्कूल को इसमें स्थानांतरित कर तत्काल विद्यार्थियों की समस्या को हल कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभी तक के निर्माण कार्य में करीब 45 लाख रुपये की राशि खर्च कर दी गई है।
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