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छह लाख की आबादी,बसें मात्र 540

Udhampur

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
उधमपुर। खस्ता हाल सड़क वजह हो या लोगों में मोटर लाइन के व्यवसाय के प्रति कम होते रुझान, लेकिन जिले के कई ऐसे रूट हैं जहां एक भी मेडाटोर नहीं चलती और कई ऐसे भी इलाके हैं, जहां एक या दो बस या मिनी बसें चलती हैं। आंकड़ों के मुताबिक जिले की करीब छह लाख की आबादी के लिए कुल 540 बसें और मिनी बसें चलती हैं। ओवरलोडिंग की सबसे बड़ी वजह यही है।
वर्तमान समय में जिला उधमपुर की आबादी करीब छह लाख है। करीब 18 प्रतिशत जनता शहर में रहती है, जबकि 82 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों में रहती है। शहर के लोगों के पास आने-जाने के लिए अपने निजी वाहन हैं, मगर गांव में रहने वालों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी मेटाडोर, बस या अन्य यात्री वाहन ही है। करीब छह लाख की आबादी के लिए 390 मिनी बस और 150 बसें सभी रूट पर चल रही हैं। आबादी और यात्री वाहनों की संख्या से ही अंदाजा लग जाता है कि यह वाहन पर्याप्त नहीं है। वाहनों की कमी की सबसे ज्यादा समस्या दूरदराज ग्रामीण इलाकों के रूट पर है। उधमपुर से पखलाई, उधमपुर से पावर हाउस, उधमपुर से चांग, उधमपुर से चक्खड़, उधमपुर से पट्ठी, उधमपुर से सीन ठकरा, उधमपुर से बसतंगढ़, उधमपुर से गंडाला, रामनगर से चौकी व अन्य कई रूट पर अतिरिक्त वाहनों की सख्त जरूरत हैं लेकिन, कई प्रयास करने के बावजूद इन रूटों पर अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

खस्ताहाल सड़कें बड़ी वजह
यात्री वाहन कम चलने का सबसे बड़ा कारण खस्ताहाल सड़कें हैं। इन रूट की सड़कों की हालत इतनी ज्यादा खस्ता हो चुकी है कि चालक अपने यात्री वाहनों को ले जाने को तैयार नहीं है। वाहनों की कमी के कारण ही ओवर लोडिंग होती है। हर व्यक्ति किसी भी हालत में अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहता हैं। इसलिए हालात यह हो जाते हैं कि बस और मिनी बस के अंदर ही नहीं, छत भी यात्रियों से भर जाती है।

जिन रूट पर वाहन कम चल रहे हैं, वहां वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास चल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में ग्रामीण इलाकों में करीब 20 नए यात्री वाहन लगाए हैं। सर्वे करके पता लगाया जा रहा कि किस रूट में वाहन कम हैं और किस रूट पर जरूरत के अधिक वाहन चल रहे हैं। जिन रूटों पर ज्यादा वाहन हैं, वहां से वाहन को वापस लाकर कम रूट वाले क्षेत्र में चलाने का प्रयास किया जा रहा है। -पवन शर्मा, एआरटीओ उधमपुर
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