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यश चोपड़ा की सांसों में बसा रहा कश्मीर

श्रीनगर/अमर उजाला ब्यूरो

Updated Mon, 22 Oct 2012 03:54 PM IST
kashmir was in heart of yash chopra
कश्मीर की सुंदरता को अपनी फिल्मों से सारी दुनिया को दिखाने वाले यश चोपड़ा अपनी आखिरी फिल्म की शूटिंग करने भी कश्मीर ही पहुंचे। इस बार उनकी फिल्म का नाम भी शायद उनकी अपनी जिंदगी से जुड़ा था। फिल्म का नाम था जब तक है जान। यश चोपड़ा का भी कहना था कि जब तक जान है, वह कश्मीर की वादियों को अपनी फिल्मों में दिखाते रहेंगे। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल में एक सप्ताह तक रहने वाले चोपड़ा पूरी तरह से उसकी सुंदरता में खो गए थे।
पहलगाम स्थित पाइन एंड पीक होटल में सात दिनों तक अपनी फिल्म के लिए वह हर बेहतर दृश्य को कैमरे में कैद कर लेना चाहते थे। आखिरी बार कश्मीर पहुंचे यश चोपड़ा का शूटिंग के बाद मीडिया से बात करते हुए कहना था कि पिछले बाइस सालों से कश्मीर के हालात खराब जरूर थे, लेकिन घाटी का प्राकृतिक सौंदर्य आज भी वैसा ही है। कश्मीर पहुंच कर उनको ऐसा लग रहा है कि मानो वह बरसों बाद घर पहुंचे हों।

यश चोपड़ा को करीब से जानने वाले तारिक बख्शी का कहना है कि उनको कश्मीर से बहुत ज्यादा लगाव था। आखिरी बार कश्मीर पहुंचे चोपड़ा ललित ग्रैंड पैलेस में काफी खुश नजर आ रहे थे। होटल प्रबंधन के अनुसार वह हर रोज शाम को बाग में सैर को निकलते थे और काफी देर तक सैर करते थे। केवल उनके करीबी ही नहीं, बल्कि कश्मीर की आम जनता भी उनसे प्रेम करती है। लोगों का कहना है कि केवल यश चोपड़ा ही घाटी की खूबसूरती को कैमरे में कैद कर सके हैं और पूरी दुनिया को पता चला कि घाटी को स्वर्ग क्यों कहा जाता है।

रियासत से था खास लगाव
घाटी के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और दृश्य मायूस और दुखी हैं। कारण भी साफ है। जिस व्यक्ति की आंख ने उन सभी को कैमरे में कैद कर विश्व के सामने रखा, वह दुनिया में नहीं रहा। यश चोपड़ा और रियासत के रिश्ते को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। आतंकवाद के दौर के शुरू होने से पहले निर्माता निर्देशक के तौर पर उन्होंने अपनी लगभग हर फिल्म की शूटिंग रियासत में की। सन 1973 में रिलीज हुई दाग हो या फिर 1976 की कभी-कभी, सन 1979 में नूरी की मासूमियत हो या सन् 1981 में रिलीज हुई सिलसिला, हर किसी की शूटिंग कश्मीर में हुई। केवल फिल्में ही नहीं, बल्कि सिलसिला, डर आदि फिल्मों में कालजयी संगीत देने वाले शिव हरि की जोड़ी में पंडित शिव कुमार शर्मा जम्मू के ही हैं।
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