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संभाग के अस्पतालों में ग्लूकोज का टोटा

Rajouri

Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
राजोरी। जम्मू संभाग के सरकारी अस्पतालों मेें इन दिनों ग्लूकोज का टोटा है। हालात ये हैं कि जिला अस्पतालों को छोड़ किसी अन्य अस्पतालों में ग्लूकोज की सप्लाई ही नहीं दी जा रही है। जिला अस्पतालों में भी मात्र बीस फीसदी आपूर्ति ही की जा रही है। इसके चलते खास कर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वे भी बाहर से ग्लूकोज खरीदने को मजबूर हैं। इसकी वजह यह है कि पर्चेजिंग कमेटी बीस साल पुराने बजट पर खरीदारी कर रही है।
पांच महीने से सरकारी अस्पतालों में ग्लूकोज नहीं आ रहा है। यह स्थिति राजोरी जिले का ही नहीं, बल्कि जम्मू संभाग के सभी अस्पतालों की है। जम्मू के सरवाल और गांधी नगर अस्पताल के पास ग्लूकोज पहुंच रहा है, लेकिन अन्य अस्पताल अपने फंड से खरीद रहा है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की पर्चेजिंग कमेटी को ग्लूकोज सहित अन्य सामान खरीदना होता है, लेकिन कमेटी के पास बीस साला पुराना बजट है। जबकि एक दशक से संभाग के सभी अस्पतालों में मरीजों की संख्या तीन गुणा बढ़ गई है। करीब पांच महीने पहले ग्लूकोज देने वाली कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई रोक दी। विभाग अब दूसरी कंपनी से ग्लूकोज ले रहा है, लेकिन जितना ग्लूकोज जिलों को चाहिए, उतना नहीं मिल रहा है।
राजोरी के जिला अस्पताल में हर महीने मात्र हजार के करीब ग्लूकोज की बोतलें आ रही है। अस्पताल प्रशासन अपने विकास फंड से खरीद कर ग्लूकोज ले रहा है, लेकिन यह सिर्फ इमरजेंसी के लिए दिया जा रहा है। बाकी मरीजों को बाजार से खरीद कर लाना पड़ रहा है। ऐसा ही हाल सुंदरबनी के उप जिला अस्पताल, नौशहरा के उप जिला अस्पताल, थन्नामंडी, दरहाल, कालाकोट आदि अस्पतालों का भी है।
स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त सचिव मनोज कुमार द्विवेदी ने भी ग्लूकोज की कमी होने की बात स्वीकारी, लेकिन यह भी कहा कि खरीदारी के लिए विभाग की खरीद कमेटी है।

महंगाई और आबादी बढ़ने का असर
पर्चेजिंग कमेटी के चेयरमैन और स्वास्थ्य विभाग के निदेशक मधु खुल्लर ने कहा कि अस्पतालों को वार्षिक बजट के हिसाब से ग्लूकोज की सप्लाई दी जाती है। पिछले दस सालों से बजट नहीं बढ़ा है, लेकिन इस दौरान दवाइयों और अन्य सामान के दाम बढ़े हैं। मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। सरकार से हमने बजट बढ़ाने को कहा है। लेकिन अस्पतालों में ग्लूकोज की कमी नहीं है। अस्पतालों के पास डिलीवरी, सर्जरी आदि का फंड होता है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, सीएमओ और बीएमओ सभी को फिर भी कहा गया है कि वे लोग सप्लीमेंट्री तौर पर अपने फंड का इस्तेमाल कर ग्लूकोज खरीदें। अस्पताल प्रबंधन व्यवस्था को संभालें।
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