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रियायतों के बिना मुर्झाने लगे हैं उद्योग

Kathua

Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कठुआ। औद्योगिक विकास की रफ्तार एकाएक ढीली पड़ गई है। जम्मू सूबे के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शुमार कठुआ जिले में इसे बाकायदा महसूस किया जाने लगा है। बीते वित्तीय वर्ष तक जहां बाहरी राज्यों से आने वाले बड़े निवेशकों द्वारा कठुआ जिले के लिए पंजीकरण में रुचि दिखाई जा रही थी, वहीं अब हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। इसकी मुख्य वजह केंद्र से मिलने वाली रियायतों को वापस लेना है। जून 2012 से खत्म की गईं रियायतों के बाद जिला उद्योग केंद्र के पास पहुंच रहे पंजीकरण के आवेदनों में कमी आई है। उस पर अधिकांश आवेदक जम्मू कश्मीर से ही हैं जो छिटपुट स्तर पर निवेश का प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं। दरअसल, जम्मू कश्मीर में बीते दो दशक के दौरान औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग तरह की रियायतें दी गईं। सरकारी आदेश के मुताबिक जम्मू कश्मीर में निवेश करने वाले उद्योग धंधाें को केंद्र की ओर से मिलने वाली सेंट्रल एक्साइज, आयकर और केंद्रीय और राज्य सरकार की ओर से आयात शुल्क से लेकर कई अन्य तरह की रियायतें देकर निवेशकों को जम्मू कश्मीर की ओर रिझाया गया। तय मियाद के पूरी होने पर केंद्रीय सरकार ने इसी वर्ष जून माह से अपनी प्रमुख रियायतों को वापस ले लिया। इसकी वजह से बड़े निवेशकों ने भी जम्मू कश्मीर में रुचि कम कर दी है। हालात यहां तक हो गए हैं कि कई बडे़ निवेशकों ने पंजीकरण के आवेदन भी वापस ले लिए हैं। जिला उद्योग केंद्र में बीते वित्तीय वर्ष में जहां प्रोविजनल श्रेणी में सवा सौ औद्योगिक इकाईयों का पंजीकरण करवाया गया, वहीं इस वर्ष अगस्त माह तक यह आंकड़ा पैंतीस तक ही पहुंच पाया है। वहीं उद्योग में हाथ आजमाने वालों में अधिकांश निवेशक छिटपुट और स्थानीय हैं। यह रुझान औद्योगिक विकास की संभावनाओं के लिहाज से खासा नकारात्मक है।
क्या कहते हैं उद्योगपति
पड़ोसी राज्यों की तुलना में जम्मू कश्मीर औद्योगिक विकास के मामले में बुरी तरह से पिछड़ गया है। केंद्र से मिलने वाली प्रमुख रियायतों को जून महीने से खत्म कर दिया गया है। ब्याज में रियायत सहित आयात शुल्क, ट्रेड सब्सिडी, आयकर में छूट के प्रावधान खत्म कर दिए गए हैं। यही वजह है कि बाहरी निवेशकों के लिए जम्मू कश्मीर में आकर काम करना मुश्किल हो गया है। कच्चा माल बाहरी राज्यों से आता है। तैयार माल को बेचने का बाजार भी बाहरी राज्यों में है। ऐसे में रियायतों के बिना निवेशक दूसरे राज्यों से कैसे स्पर्द्धा कर सकते हैं?
-देविंदर वर्मा, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियलिस्ट्स एसोसिएशन, कठुआ

क्या कहते हैं अधिकारी
बाहरी निवेशकों के आवेदन कम आ रहे हैं। केंद्रीय सरकार द्वारा दी जाने वाली रियायतें खत्म करना इसके पीछे बड़ी वजह कही जा सकती है। पिछले तीन महीनों में पंजीकरण के लिए आए आवेदन बीते वर्ष की तुलना में वार्षिक औसत से कम हैं और इनमें ज्यादातर स्थानीय आवेदक हैं।
-डा. भारत भूषण, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र कठुआ
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