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सैलानियाें की बाट जोह रहा

Kathua

Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
कठुआ। पर्यटन विकास की असीम संभावनाओं के बावजूद कठुआ जिले पर जरूरत के मुताबिक सरकारी नजरें इनायत नहीं मिल पा रही है। विकास के मद में राशि को मंजूर करने के मामले में केंद्रीय सरकार की दरियादिली के बावजूद पर्यटन विकास का मूर्त रूप ले पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। अधिकांश परियोजनाएं या तो निर्माणाधीन हैं या फिर विचाराधीन। यही वजह है कि अलग से टूरिस्ट सर्किट बनाए जाने के छह वर्ष बाद भी यह सर्किट सैलानियाें को रिझाने में नाकाम रहा है। दरअसल, आतंकवाद प्रभावित राज्य जम्मू कश्मीर के सबसे शांत जिलाें में शुमार कठुआ में सब ट्रापिकल, इंटर मीडिएट से लेकर टैंपरेट श्रेणी की जलवायु पाई जाती है। अपने आप में इस विरली भौगोलिक परिस्थितियाें में जहां कठुआ के मैदानी इलाके आते हैं, वहीं कंडी और पहाड़ी इलाकों में वातावरण समेत ऐतिहासिक धरोहरें और रणजीत सागर बांध की झील जैसे पर्यटन विकास के बड़े विकल्प। इस सबके बावजूद ज्यादातर संभावनाएं हकीकत में तब्दील नहीं हो पाई हैं। गौरतलब है कि कठुआ जिले की विरली भौगोलिक स्थिति, पहाड़ी इलाकों की दिलकश खूबसूरती और पंजाब, हिमाचल प्रदेश राज्यों समेत डोडा जिले से नजदीकी को देखते हुए अलग से डेवलपमेंट अथारिटी का गठन किया गया। लखनपुर सरथल डेवलपमेंट अथारिटी के नाम से बने अलग प्राधिकरण के माध्यम से यह राज्य का सबसे बड़ा टूरिस्ट सर्किट है। वित्तीय वर्ष 2005-06 में रियासत की चौदह नई अथारिटी के साथ एलएसडीए को मंजूरी दी गई और इसके अगले वर्ष से सक्रिय कर दिया गया। पहले चरण में केंद्रीय सरकार की ओर से लगभग आठ करोड़ की राशि मंजूर की गई। इस राशि से लखनपुर से लेकर सरथल तक चिह्नित स्थानाें में पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं बहाल की जानी थीं जो अभी तक पूरी तरह से मूर्त रूप नहीं ले पाईं हैं। पर्यटन विभाग के दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अधर में लटके हुए हैं। लखनपुर में प्रस्तावित करोड़ों की लागत वाला ट्रेवलर मार्ट हो या फिर खरोट मोड़ के निकट जम्मू संभाग का सबसे बड़ा सरकारी रेस्तरां का प्रोजेक्ट। दोनों की परियोजनाओं में पर्यटन विभाग अपने लक्ष्य से पीछे छूट गया है।
कुल मिलाकर पर्यटन विकास के लिए किए गए प्रयास गाहे बगाहे अड़चनाें में उलझकर रह गए हैं।
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