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पाक फायरिंग से सीमावर्ती इलाकों में फिर दहशत

Kathua

Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
कठुआ। एक तरफ देश भर में आजादी का जश्न मनाया जा रहा था तो दूसरी तरफ तीन बड़े गांव सरहद पार से बरसाई जा रही गोलियों से जूझ रहे थे। खेताें में काम करने गए किसान गोलीबारी के बीच फंस गए। आवासीय इलाकों में गोलियों की तड़तड़ाहट से हर कोई सन्न रह गया। कहीं कोई घर में दुबका रहा तो कोई परिवार सदस्यों को साथ लेकर किसी दूसरी जगह ठौर तलाशने में जुट गया। हीरानगर के पानसर, रठुआ और मनियारी गांवों में आजादी के जश्न के बीच पाकिस्तान की नापाक हरकत ने सिहरन पैदा कर दी।
भारत-पाकिस्तान की सरहद पर बसे होने का मोल चुका रहे ग्रामीणों की यह आपबीती पंद्रह अगस्त की दोपहर की है। गाहे बगाहे सीमा रेखा की फायरिंग का सामना करने वाले ग्रामीणाें के सब्र का बांध इस घटना से टूटता नजर आया। पाकिस्तान के चिनाब रेंजरों के सिरफिरेपन से आजिज ग्रामीणों ने पलायन की इच्छा जताना शुरू कर दी। स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन ने जब उन्हें समझाने का प्रयास किया तो ग्रामीणों का दर्द जैसे बरबस रिसकर सामने आ गया। फायरिंग से उपजे हालात में तमतमाई सावित्री देवी ने कहा कि अफसर दौरा कर लौट जाते हैं। पाकिस्तान की गोलियों का सामना तो ग्रामीणों को करना पड़ता है। वहीं पाकिस्तान की ओर से यकायक की गई फायरिंग के चलते आधे घंटे तक खेत में फंसे रहे किसान कृष्ण चंद ने बताया कि गोलीबारी में वह बड़ी मुश्किल से बचकर आए हैं। कृष्ण चंद के अनुसार गोलीबारी के दौरान अन्य किसानों सहित वह भी खेत में लेट गए और धीरे-धीरे सरकते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंच पाए। इसी तरह से ज्योति, सावित्री समेत अन्य महिलाआें ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों पर क्या कुछ बीत रहा है इससे सरकार और प्रशासन पूरी तरह से वाकिफ नहीं लगते। यही वजह है कि सुरक्षित स्थानों पर ठहराने के बजाए सरकार उन्हें पाकिस्तानी रेंजरों की गोलीबारी से जूझने के लिए छोड़ रही है। स्थानीय सरपंच बिशनदास शर्मा ने कहा कि लोग न तो चैन से रह पा रहे हैं और ना ही खेती कर पा रहे हैं। पाकिस्तान से की जा रही फायरिंग को देखते हुए प्रशासन को प्रति कुनबा पांच मरला भूमि एलाट करनी चाहिए ताकि वह आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित जगह रह सकें।
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