पाकिस्तान के पुरातत्ववेत्ताओं ने सिंधु घाटी सभ्यता काल की मुहर खोजने में सफलता प्राप्त की है। अनुमान के मुताबिक इसका निर्माण 2,500 से 2,000 ईसा पूर्व हुआ होगा। इस मुहर पर एक जंगली बकरी के साथ दो लेखाचित्र भी अंकित हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के चेयरमैन फरजंद माहिश की अगुवाई वाले छह सदस्यीय दल ने इस मुहर को पंजाब के डेरावार किले से लगने वाली हाकरा नदी की तलहटी से खोजा है।
संख्या सिद्घांत का एकमात्र नमूना
अपनी उपलब्धि पर बोलते हुए माहिश ने कहा कि यह खोज छात्रों के लिए अध्ययन के नए आयाम खोेलेगी। उन्होंने कहा कि इस मुहर ने हड़प्पा सभ्यता की कुछ नई विशेषताओं को उजागर किया है। मुहर की बनावट चौकोर है। हालांकि यह दाहिनी ओर से हल्की टूटी हुई है, लेकिन बकरियों के चित्र पूरी तरह से दिखाई पड़ रहे हैं। बकरी की मांसपेशियों और पूंछ की बनावट देखकर उस काल की उत्कृष्ट कलाकारी का बोध होता है। पंजाब विश्वविद्यालय ने पास के ही सुई विहार में एक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया है, जो पाकिस्तान में संख्या सिद्घांत का एकमात्र नमूना है।
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