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लाओस को करोड़ों डॉलर कर्ज देगा भारत |
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| वियनतियाने। |
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| Story Update : Friday, September 10, 2010 11:05 PM |
आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को बढ़ाने के उद्देश्य से भारत ने लाओस को पनबिजली परियोजनाओं के लिए 7.25 करोड़ डॉलर का कर्ज देने की घोषणा की है। लाओस में भारत का कुल निवेश बढ़कर 16.2 करोड़ डॉलर हो गया है। दोनों देशों ने तीन साल के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का भी नवीकरण किया। इससे दोनों देशों के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति एवं कला, युवा मामले और खेल तथा मास मीडिया में सहयोग बढ़ेगा।
लाओस की यात्रा पर प्रतिभा पाटिल राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इस समय लाओस की यात्रा पर हैं। दोनों देशों के राष्ट्रपति की बातचीत में भारत ने इसकी घोषणा की। पाटिल ने लाओस के राष्ट्रपति चाउमाली सयासोन को बताया कि भारत दो परियोजनाओं के लिए लाओस को 7.25 करोड़ डॉलर की मदद उपलब्ध कराएगा। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजया लता रेड्डी ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि लाओस ने एक फरवरी, 2010 को दो पनबिजली परियोजनाओं के लिए 7. 25 अरब डॉलर के कर्ज का आग्रह किया था। लाओस में भारत के राजदूत जितेंद्र नाथ मिश्र ने बताया कि अब इस देश में भारत का निवेश बढ़कर 16.2 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है। सूत्रों ने कहा कि लाओस ने चार प्रांतों में सिंचाई परियोजनाओं के विकास के लिए तीन करोड़ डॉलर की मदद और मांगी है।
11 वीं सदी के शिव मंदिर का जीर्णोद्धार कराएगा भारत भारत दक्षिण लाओस में स्थित 11वीं सदी के वाट फोऊ मंदिर परिसर का जीर्णोद्धार कराने पर सहमत हो गया है। यह कार्य भारत दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सहयोग के तहत करेगा। वाट फोऊ दक्षिण लाओस के खमेर मंदिर परिसर में है। यह चम्पासक प्रांत में मेकांग नदी के पास स्थित फू काओ पर्वत पर स्थित है। फू काओ को लिंग के आकार है, जिसे शिव का प्रतीक माना जाता है। इसे लिंगापर्वत के नाम से जाना जाता है। विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) विजया लता रेड्डी ने बताया कि इस मंदिर के पुनर्निर्माण का काम 2009 में शुरू हुआ था। लाओस में मानसून खत्म होने के बाद फिर से काम शुरू होगा। प्रोजेक्ट के पूरा होने में सात साल लगेंगे।
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