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गैस फील्ड के विकास में देरी से तेहरान नाराज

तेहरान।
Story Update : Monday, February 06, 2012    10:39 PM
Tehran upset by delays in the development of gas fields

एक गैस फील्ड के विकास में देरी से नाराज ईरान ने एक भारतीय संकाय को एक माह का अल्टीमेटम दिया है। रविवार को अर्द्ध सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में भारत द्वारा गैस फील्ड के विकास में देरी किए जाने के लिए पश्चिमी देशों के दबाव को जिम्मेदार ठहराया है। पिछले महीने ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव उस समय और तल्ख हो गया जब अमेरिका और यूरोपीय संघ ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने की कवायद के तहत उस पर सख्त प्रतिबंध थोप दिए।

फार्स न्यूज एजेंसी ने एक अनाम ऑयल अधिकारी के हवाले से कहा कि ईरान ने भारत को फरजाद बी गैस फील्ड के डेवलपमेंट में हिस्सेदारी पर अपने फैसले के लिए एक माह का समय दिया है। उसने कहा कि गैस फील्ड के विकास में भारत द्वारा देरी किए जाने के पीछे विदेशी दबाव की अहम भूमिका है। ईरान ने कहा कि गैस रिजर्व क्षेत्र में स्थित इस फील्ड में 21.7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस होने का अनुमान है, जिसमें से 12.5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस हासिल किए जाने योग्य है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान सरकारी तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड से तीन सालों से बात कर रहा है। अक्तूबर 2010 में ईरान ने कहा था कि वह जल्द ही फरजाद बी गैस फील्ड के विकास के लिए एक विदेशी कंपनी से 5 बिलियन डॉलर का समझौता करेगा। हालांकि उस समय ईरान ने कंपनी का नाम नहीं बताया था। ओएनजीसी को अपतटीय फारसी ब्लॉक के लिए विशेष खोज अधिकार हासिल हुए थे। फरजाद बी गैस फील्ड इस ब्लॉक का ही एक हिस्सा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के नए साल की पूर्व संध्या पर नए प्रतिबंधों पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद यूरोपीय संघ ने ईरान के तेल पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिकी प्रतिबंधों के मुताबिक, ईरान के सेंट्रल बैंक के साथ डीन करने वाले किसी अन्य देश की संस्था को भी अमेरिकी आर्थिक प्रणाली की ओर से ब्लॉक कर दिया जाएगा। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 12 फीसदी हिस्सा ईरान से हासिल करता है।

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हाल में ही कहा था कि वह ईरान से तेल आयात करना बंद नहीं करेगा। यदि अमेरिकी कानून को पूरी तरह से लागू किया गया तो अन्य देशों के लिए ईरान का तेल खरीदना असंभव हो जाएगा। ईरान में दुनिया का दूसरा बड़ा प्राकृतिक गैस रिजर्व क्षेत्र है लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से ऊर्जा क्षेत्र का धीमी गति से विकास हो रहा है। कई विदेशी कंपनियां प्रतिबंधों के डर से इस इसलामिक देश के ऊर्जा सेक्टर से मजबूरन हट चुकी हैं।


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