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...तो अमेरिका में मिल जाएगा एशिया

लंदन/इंटरनेट डेस्क।
Story Update : Thursday, February 09, 2012    3:12 PM
Asia America will be new continent

आज हमें भारत से अमेरिका जाने में हजारों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है, लेकिन सोचिए कि किसी दिन दोनों देश पडो़सी हो जाएं या एशिया और अमेरिकी महाद्वीप का वजूद एक हो जाए। जी हां अमेरिका के येल यूनिर्वसिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि बीस करोड़ साल बाद यह बात सच साबित हो सकती है।

क्यूं बनेगी ऐसी स्थिति
शोध के मुताबिक हर जगह की जमीन काफी धीमी गति से अपनी जगह से खिसकते रहते हैं। इसलिए कई करोड़ साल के बाद दो महादेश की जमीन आपस में टकराएगी। इस बार उत्तरी धूर्व पर अमेरिका और यूरेशिया एक-दूसरे से बुरी तरह टकराएंगे। इससे बनने वाले 'सुपर कॉंन्टिनेन्ट' में अफ्रीका और ऑस्ट्रलिया भी शामिल होंगे।

पहले भी हुए ऐसे प्राकृतिक कारनामे
वैज्ञानिकों का कहना है कि दो महाद्वीपों की जमीन पहले भी टकरा चुके हैं। तीस करोड़ साल पहले बिल्कुल इसी तरह पेनगिया नामक 'सुपर कांटिनेन्ट' का जन्म हुआ था। अगले 'सुपर कांटिनेन्ट' का नामकरण पहले से ही किया जा चुका है। शोध परिणाम के मुताबिक 'अमेशिया' नामक ये 'सुपर कांटिनेन्ट' अमेरिका और एशिया महाद्वीप के मिलने से बनेगा।

अब एशिया और अमेरिका की बारी
इस बार दो महाद्वीपों की जमीन टकराने से उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका को मिलाते हुए, कैरेबियाई सागर और आर्कटिक सागर को बंद करके अमेरिका और एशिया आपस में जुड़ जाएंगे। नए 'सुपर कांटिनेन्ट' में केवल अंटार्कटिका महाद्वीप शामिल नहीं होगा. ये अनुमान दरअसल उन 'मैग्नेटिक डेटा' के विश्लेषण पर आधारित है जिन्होंने दुनियाभर में चट्टानों को एक तरह से बांधकर रखा है।


ऐसे किया शोध
इस शोध में अमेरिका का मेल उस जगह से कराया गया है जिसे हम 'प्रशांत अग्नि वलय' के नाम से जानते हैं. इस नए क्षेत्र में यूरोप, यूरेशियाई भूमि का कुछ हिस्सा, अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया के शामिल होने का अनुमान है। शोधकर्ता रॉस मिचेल ने बताया कि प्राचीन चट्टानें, एक ख़ास तरह के चुम्बकीय गुण की वजह से जुड़ जाती हैं। इससे अक्षांश का एकदम सटीक संकेत मिल जाता है लेकिन ऐतिहासिक रूप से हमें देशांतर के संकेत नहीं मिलते हैं।

ब्रिटेन टकराएगा अमेरिका से
ओपन यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉक्टर डेविड रॉथरी ने बताया कि भविष्‍य में ब्रिटेन अमेरिका से टकराएगा। उन्‍होंने कहा कि इन शोध को सकारात्‍मक रूप में लेना चाहिए। इससे पृथ्वी के इतिहास को समझने में हमे मदद मिलेगी। इस प्रयोग को आधार बनाकर वातावरण के भविष्‍य के बारे में पता लगा सकेंगे।


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DEVENDA SHARMA, Montreal
कुछ लोगों का काम है कोरी बकवास करना. मेरी भगवान से प्रार्थना है कि ऐसे लोगों को थोड़ी सी सद बुध्हि दे दो जिससे ऐसे लोग समाज के लिए इससे कुछ अच्छा काम कर सकें.
aman kushwaha, guwahati
बकवास हैं कुछ कम नहीं nain
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