आस्ट्रेलिया के शीर्ष अनुसंधान विश्वविद्यालयों ने छात्र वीजा नियमों में बदलाव से उत्पन्न समस्याओं से निपटने में विफल रहने के लिए संघीय सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे देश का अरबों डॉलर वाला विदेशी शिक्षा उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है। समाचार पत्र ‘द एज’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार आठ विश्वविद्यालयों के समूह के कार्यकारी निदेशक माइकल गैलेगर ने कहा कि विदेशों में आस्ट्रेलियाई समाज की ज्ञान और विविधता का स्वागत करने वाली छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों का यह दायित्व बनता है कि वे इसकी भरपाई करें।
अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र को समर्थन देना चाहिए
माइकल ने सरकार से अपनी मांग दोहराई कि उसे सार्वजनिक रूप से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र को समर्थन देना चाहिए, क्योंकि इस क्षेत्र से प्रतिवर्ष 17 अरब डॉलर की आमदनी होती है। उन्होंने कहा कि प्रवासी मामलों के मंत्री क्रिस इवांस ने कहा था कि आस्ट्रेलिया अभी भी विदेशी छात्रों का स्वागत करता है। हालांकि इससे बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। क्रिस ने हावर्ड सरकार पर एक ऐसा छात्र कार्यक्रम चलाने का आरोप लगाया, जो फर्जी आवेदनों की पहचान करने में असफल रहा। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत सही वीजा धारक छात्रों की पहचान करने का कोई उपाय नहीं था। इस समूह ने हाल में देश की दोनों राजनीतिक पार्टियों से वर्तमान वीजा नियमों में बदलाव का अनुरोध किया था।
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