पिछले चार सालों में अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों के काम संबंधी वीजा जारी करने से इनकार करने में वृद्धि हुई है। एक अमेरिकी थिंक टैंक ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा है कि वीजा से इनकार किए जाने वाले में सबसे अधिक भारतीय प्रोफेशनल्स प्रभावित हो रहे हैं। किसी अन्य देश की तुलना में भारतीयों को वीजा देने से ज्यादा इनकार किया जा रहा है।
एच1बी याचिकाओं को ज्यादा नकारा जा रहा
नेशनल फाउंडेशन फार अमेरिकन पॉलिसी (एनएफएपी) द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज से प्राप्त नए आंकड़ों के अध्ययन से पता चला है कि एजेंसी 2008 की शुरुआत से ही एल1 और एच1बी याचिकाओं को ज्यादा नकार रहा है, जिससे अमेरिकी नियोक्ताओं की प्रतिस्पर्धात्मकता को हानि पहुंचा रही है और कंपनियों को और अधिक नौकरियां बनाएं रखने और संसाधनों को देश के बाहर ले जाने को प्रोत्साहित कर रही है।
आवेदन नकारने की दर बढ़ती जा रही
‘डाटा रिवेल हाई डिनाइल रेट्स फार एल1 एंड एच1 पिटीशन एट यूएससीआईएस’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा है कि भारत में जन्में प्रोफेशनल्स और शोधकर्ताओं की एल1 और एच1 वीजा याचिका को सबसे अधिक नकारा गया है। इसमें कहा गया है कि नए एल1बी वीजा के लिए भारत में जन्में आवेदनकर्ताओं को नकारने की दर जहां 2008 वित्तीय वर्ष में 2.8 फीसदी थी, वहीं 2009 में यह बढ़कर 22.5 फीसदी हो गई।
1341 वीजा को ही खारिज किया गया
इसके परिणाम स्वरूप कई नियोक्ता अपने कर्मियों को रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम करने या कस्टमर की सेवा करने के लिए अमेरिका भेजने में नाकाम रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2009 में इमिग्रेशन अधिकारियों ने एल1बी वीजा की नई भारतीय आवेदनों को सबसे अधिक (1640) नकारा, जबकि 2000 से 2008 के बीच भारतीयों के 1341 वीजा को ही खारिज किया गया।
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