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चुनावी बेला पर फिर एसईजेड की गूंज

Una

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
ऊना। अरबों रुपये से ऊना जिले में स्थापित होेने वाले एसईजेड (विशेष आर्थिक जोन) की गूंज चुनावी बेला पर फिर उठी है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के दखल से मुद्दा गरमा गया है। वर्ष 2008 की तरह फिर इस पर हल्ला हो रहा है। प्रोजेक्ट का 2008 में संघर्ष समिति ने भारी विरोध किया था। जिससे समयावधि खत्म होने के चलते प्रोजेक्ट लटक गया। एचएनए का कहना है कि प्रदेश सरकार ने इसके लिए फिर से आवेदन किया है और हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट पर फिर से विचार करने का फैसला लिया है। हिमालय नीति अभियान तथा स्थानीय संघर्ष समिति तर्क दे रही है कि प्रस्तावित एसईजेड के तहत अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, पर्यटन एवं फिल्म सिटी की संयुक्तपरियोजना से 26 गांवों की 80 हजार आबादी विस्थापित होगी। विस्थापन का दंश अंबोटा से गणु मंदवाड़ा, सलोह बैरी से मुबारिकपुर तक के 26 गांवों के लोगों को झेलना पड़ेगा। प्रस्तावित एसईजेड हजारों हेक्टेयर भूमि को भी किसानों से छीनेगा। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह कहते हैं कि भाखड़ा और पौंग के विस्थापितों के जख्म आज भी हरे हैं। विस्थापित दर-दर भटक रहे हैं। कुछ विस्थापितों को हिमाचल से बाहर जमीनें दीं लेकिन, वहां भी झगड़ा ही रहा। पूर्व में हुए विरोध के बाद राज्य सरकार ने इस परियोजना को खारिज नहीं किया। पूर्व में संघर्ष समिति के पदाधिकारी रहे नरेंद्र परमार कहते हैं कि इतने विरोध के बावजूद सरकार नहीं जागी। परमार गगरेट से हिलोपा के प्रत्याशी भी हैं। वे कहते हैं कि आज तक इस परियोजना को रोके रखा है तथा कं पनी और सरकार कु छ भी नहीं कर सकी। पांच सौ लोगों पर झूठे मुकदमे भी सरकार ने बनाए। भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारें इस परियोजना के हिमायती तथा आम जनता की विरोधी रही हैं।
क्या है एसईजेड
विशेष आर्थिक क्षेत्र में एयरपोर्ट, पर्यटन एवं फिल्म सिटी, बड़े होटल आदि का निर्माण होना है। इसके लिए हजारों हेक्टेयर जमीन चाहिए। इसका निर्माण स्किल इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को दिया था। 2008 में विरोध के चलते प्रोजेक्ट शुरू न हो सका।


प्रस्तावित जमीन अधिकतर निजी
बसपा के जिला मीडिया प्रभारी शैलेष दुबे कहते हैं कि वन अधिकार कानून के तहत यहां के जो किसान वन भूमि पर खेती कर रहे हैं तथा जिन्होंने आवासीय घर भी बनाए हैं, उनका इस जमीन पर मालिकाना हक है। कानून के अनुसार इसके बदले किसानों को पट्टे दिए जाएं। पुन: स्थापना से संबंधित संशोधित कानून भी आम लोगों के हक में है।

जैसा लोग चाहेंगे, वैसा होगा : सत्ती
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती कहते हैं कि लोगों के हितों को देखते हुए परियोजना को छोड़ दिया गया है। जैसा लोग चाहेंगे, उसी तर्ज पर परियोजना की स्थापना की दिशा में सोचेंगे। मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल स्वयं इस मामले को देख रहे हैं।

भाजपा ने किया परियोजना में परिवर्तन : धर्माणी
कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष वरिंद्र धर्माणी कहते हैं कि कांग्रेस हालांकि इस परियोजना के विरोध में नहीं थी। कांग्रेस विस्थापन भी नहीं चाहती थी। इसलिए एयरपोर्ट निर्माण को अंब से स्वां होते हुए चुरूड़ू हंबोली तक गैर कृषि योग्य भूमि चिन्हित की गई। बाद में भाजपा ने परियोजना में परिवर्तन करते हुए गगरेट तथा आसपास आबादी वाला क्षेत्र चुना, जिसका विरोध हुआ।
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