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आपदा प्रबंधन के नाम पर विपदा

Solan

Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
आपदा प्रबंधन के नाम पर विपदा
सोलन। जिला प्रशासन का आपदा प्रबंधन क्या विपदा को बढ़ाने वाला हैै? डिसास्टर मैनेजमेंट को लेकर होने वाली बैठकें क्या महज औपचारिकताएं तक सीमित हैं? हादसा होने के बाद प्रशासनिक अमला लेट क्यों पहुंचता है?
दमकल विभाग के पास आधुनिक उपकरणों की कमी समेत कई ऐसी चीजें विपदा को बढ़ावा देने वाली नहीं तो क्या हैं? इस तरह रेस्क्यू आपरेशन में कोताही लोगों के जान माल पर कभी भी भारी पड़ सकती है। बुधवार को हुए हादसे के बाद रेस्कयू आपरेशन की धीमी रफ्तार पर कई तरह के सवाल उठ खड़े हुए हैं। खोखली मिट्टी पर खड़े कंकरीट के मकान प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पहाड़ों में भवन निर्माण की बेहतर तकनीक की अनदेखी भी हो रही है, जिससे ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं। प्रशासन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर परिषद सब की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ खड़े हो रहे हैं।
एसडीएम हरबंस नेगी ने बताया कि प्रशासन पूरी मेहनत के साथ रेस्कयू आपरेशन को अंजाम दे रहा है। इस मामले में हर पहलू में छानबीन की जाएगी। मलबे में कुछ लोग दबे हो सकते हैं, इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है।



तीन घंटे बाद पहुंची सेना की टुकड़ी
सोलन। हादसे के तीन घंटे बाद सेना की टुकड़ी स्पाट पर पहुंची है। कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने मौके पर पहुंचकर रेस्कयू आपरेशन को गति दी। पुलिस के मुताबिक हादसे दोपहर करीब पौने चार बजे हुआ है। उधर शाम छह बजे सेना की टुकड़ी बचाव के लिए पहुंची है। उधर देर शाम तक रेस्कयू आपरेशन जारी था।

रेस्कयू आपरेशन बेहद स्लो
सोलन। भाजपा नेता एचएन कश्यप ने प्रशासन के रेस्कयू आपरेशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लेट लतीफी साफ झलक रही है। मलबे के ढेर में धुंआ उठा रहा है। ऐसे में कुछ लोगों के होने का अंदेशा है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह लेट रेस्कयू में दबे लोगों के बचने की संभावना कम रहती है।

पिछले हादसों से नहीं लिया सबक
सोलन। सोलन में भवन जमींदोज होने के चार मामले हो चुके हैं। पिछले वर्ष दिहूंघाट के पास तीन मंजिला निर्माणधीण भवन मलबे में तब्दील हो गया था। एक भवन चंबाघाट के पास हादसा हो चुका है। उससे पहले भी कुछ और हादसे हो चुके हैं। इन मामलों की जांच भी ठंडे बस्तों में पड़ी है। ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो रही है।
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