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डाक्टर बनने की कोशिश न करें अभिभावक

Sirmour

Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
डाक्टर बनने की कोशिश न करें अभिभावक
नाहन (सिरमौर)। आप बच्चों के मां-बाप हैं तो वही बने रहें। डाक्टर बनने की कोशिश न करें। यह कहना है डाक्टरों का। राज्य सहित जिले में 30-35 फीसदी बीमार डाक्टर की सलाह बिना दवा खा रहे हैं। पर्वतीय इलाकों में यह संख्या 40 फीसदी बैठ रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा खतरा नौनिहालों को हो रहा है। वैसे भी बरसाती सीजन में इस समय आधे से अधिक बच्चे बुखार से पीड़ित हैं।
बच्चों को हल्का बुखार या किसी तरह के दर्द में लोग सीधे केमिस्ट के पास पहुंच रहे हैं। उल्टी, दस्त, खाज, खुजली, भूख न लगने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा दी जा रही है। खास तौर पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं। इन दवाओं से बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीएनेलेजिक, एंटीबायोटिक, स्टेरायड व एंटीएपिलेस्टिक श्रेणियों की दवाओं का सेवन कर परिजन तथा कुछ लोग बच्चों सहित अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इससे जहां बच्चों की सेहत के साथ लापरवाही वश खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं उनका जीवन खतरे में भी आ रहा है। गलत दवा देने से बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

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इन सावधानियों को अपनाइये
नाहन (सिरमौर)। दवा की समुचित जानकारी तथा मात्रा को जानिए। ओवर डोज के बारे में सतर्क रहें। एक दूसरे के विपरीत चरित्र वाली दवा घातक है। एंटीबायोटिक के साथ मल्टी विटामिन लेना खतरनाक है।

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ये दवाएं हैं प्रतिबंधित
नाहन (सिरमौर)। कुछ दवाएं पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हैं। इनमें सिप्रोऐटाडिन, डैक्सामीटासीन तथा रौक्सीकौक्सीग।
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ये दवा बच्चों को कभी न दें
नाहन (सिरमौर)। बच्चों को इन दवाओं से बचाएं। इनमें न्यूमोसलाइड, ब्रूफेन, डैफलोफिनिक सोडियम।
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क्या कहते हैं चाइल्ड स्पेशलिस्ट डाक्टर
नाहन (सिरमौर)। जिला मुख्यालय स्थित नाहन चिकित्सालय के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. अनुपम चतुर्वेदी का मानना है कि बिना डाक्टरी सलाह के दवा लेना घातक है। डा. चतुर्वेदी बताते हैं कि गलत राय से दवा लेने से बच्चों में आंतों से रक्तस्राव, लकवा, गुर्दा फेल होने का डर रहता है। यही नहीं, बच्चा हमेशा के लिए मंदबुद्धि भी हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तमाम ऐसे केस सामने आते हैं, जो गलत दवा के कारण बिगड़ जाते हैं। बिना चिकित्सकीय परामर्श के खासतौर पर एंटीबायोटिक के सेवन से एक माह से लेकर पांच वर्ष तक के बच्चों को भारी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
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