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निगम की कमाई खा रही बूढ़ी बसें

Rampur

Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
रामपुर बुशहर। परिवहन निगम के रामपुर डिपो की बूढ़ी बसें निगम की कमाई खा रही हैं। इन बसों की मेंटेनेंस पर सालाना पौने एक करोड़ से अधिक राशि खर्च हो रही है। बावजूद इसके राज्य सरकार डिपो को नई बसें उपलब्ध कराने में न जाने क्यों कंजूसी बरत रही है।
निगम के रामपुर डिपो में करीब 21 बसें ऐसी हैं, जो माइलेज पूरी कर चुकी हैं। सरकार से नई बसें न मिलने पर निगम को मजबूरन इन्हीं बसों से काम चलाना पड़ रहा है। बसें लंबे रूटों पर चलने लायक नहीं है और इन्हें ग्रामीण रूटों पर ही भेजा जाता है। ग्रामीण सड़कों की हालत ठीक न होने से खटारा बसों को नुकसान पहुंचना आम है। आए दिन बसें मेंटेनेंस मांगती हैं। अनुमान के मुताबिक डिपो में एक बस की मेंटेनेंस पर करीब 35 हजार रुपये का खर्च आता है। इस तरह से एक बस की ही मेंटेनेंस पर करीब 4 लाख 20 हजार रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। इस हिसाब से 21 बसों की मेंटेनेंस पर सालाना खर्च लगभग 88 लाख 20 हजार रुपये के बीच आ रहा है। इतने खर्च पर साल में रामपुर डिपो को कम से कम तीन नई बसें तो अवश्य मिल जातीं। लेकिन, राज्य सरकार के उपेक्षित रवैये को तो देखो, बार-बार मांग उठाने और मेंटेनेंस पर लाखों रुपये होने के बावजूद यहां के लिए नई बसें देने में कंजूसी ही बरत रही है।
निगम के आरएम सुरजीत चंद ने माना कि माइलेज पूरी कर चुकी प्रत्येक बस की मेंटेनेंस पर प्रतिमाह 30 से 35 हजार रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। बसें न होने से निगम को मजबूरन इन बसों से काम चलाना पड़ रहा है।

सवारियों की जिंदगी से भी है खिलवाड़
ग्रामीण सड़कों पर दौड़ रही बूढ़ी बसें न केवल निगम को चूना लग रही हैं, बल्कि सवारियों की जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। ऐसी बसें कभी भी धोखा दे सकती हैं।

हादसे के लिए सरकार होगी जिम्मेदार
पंचायत समिति रामपुर के पूर्व अध्यक्ष आत्मा राम कैदारटा, माकपा के सचिव बिहारी सेवगी, पूर्व विधायक नींजू राम का कहना है यह अनदेखी की हद है। ग्रामीण सड़कों की हालत ठीक न होने से इन रूटों पर अच्छी बसें होनी चाहिए, मगर सरकार की उपेक्षा से यह संभव नहीं हो रहा है। अगर इन खटारों बसों में हादसा हो गया तो इसके लिए सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार होगी।
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