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मजदूर क्रमिक अनशन पर

Rampur

Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
रामपुर बुशहर। झाकड़ी प्रोजेक्ट के ठेका मजदूरों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है। मजदूरों ने ऐलान किया है कि जब तक प्रबंधन मांगें पूरी नहीं करेगा तब तक अनशन जारी रहेगा। सोमवार को मजदूर एक बार फिर झाकड़ी में प्रोजेक्ट प्रबंधन के विरुद्ध हल्ला बोलेंगे।
प्रोजेक्ट के ठेका मजदूर श्रम कानूनों, न्यूनतम वेतन के एरियर समेत विभिन्न मांगें मनवाने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। दो हफ्ते पूर्व क्रमिक धरने पर बैठे मजदूरों की सुध न लिए जाने पर शनिवार शाम को मजदूरों ने झाकड़ी में विरोध प्रदर्शन भी किया था। रविवार से मजदूरों ने क्रमिक अनशन शुरू किया है। पहले दिन अनीता देवी, चंपा देवी, शांता देवी और मीना देवी आदि महिला मजदूर क्रमिक अनशन पर बैठीं। सीटू के कानूनी सलाहकार बिहारी सेवगी, प्रोजेक्ट मजदूर यूनियन के प्रधान राजेश कुमार और महासचिव नरेंद्र देष्टा ने कहा कि प्रोजेक्ट प्रबंधन उनकी मांगों को बिल्कुल हल्के में ले रहा है। क्रमिक अनशन तब तक जारी रहेगा, तब तक प्रबंधन मांगों को लिखित रूप में मान नहीं लेता। उन्होंने कहा कि प्रबंधन हर बार आश्वासन के लालीपाप थमाकर मजदूरों के आंदोलन को कुचलने का प्रयास करता है, मगर अबकी बार मजदूर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि सोमवार को झाकड़ी में प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस दौरान प्रबंधन से सख्ती से निपटने को भावी रणनीति भी बनाई जाएगी।

इनसेट
सीटू के कानूनी सलाहकार बिहारी सेवगी ने प्रोजेक्ट प्रमुख के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 में प्रावधान है कि मजदूर यूनियन अपनी मांगों को मनवाने को धरने प्रदर्शन करती है और प्रबंधन से अनुमति की कोई जरूरत भी नहीं है। उन्होंने कहा कि मजदूरों की समस्याओं को प्रोजेक्ट प्रमुख के समक्ष बार-बार उठाया जाता रहा है, मगर प्रबंधन ने कोई दिलचस्पी नहीं ली। केंद्र सरकार के न्यूनतम वेतन लागू करवाने के लिए यूनियन ने 14 दिसंबर 2012 को चिट्टी लिखी, उसके बाद ही न्यूनतम वेतन लागू हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट में आज ठेका मजदूरों के रहने की उचित व्यवस्था नहीं की गई है और न ही वर्दी, हेलमेट, सेफ्टी शूज दिए गए हैं। ठेका मजदूर अधिनियम 1970 में प्रावधान है कि अगर ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करता है तो कानून लागू करवाने की जिम्मेवारी मुख्य नियोक्ता की होती है। प्रबंधन को बातचीत कर मसले को सुलझाना चाहिए।
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