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सरकार कर रही नाइंसाफी : महासंघ

Mandi

Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
पधर (मंडी)। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष हेम सिंह ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल चड्ढा, महासचिव एसएस जोग्टा, उपाध्यक्ष एलआर गुलशन, सुरेश शर्मा, प्रेस सचिव एमएल चंदेल, संयुक्त सचिव मोती राम चौहान, जिला शिमला प्रभारी जगदीश मेहता, सह प्रभारी पवन ठाकुर, गंगा राम डोगरा, दीप राम शर्मा, देश राज शर्मा, भजन कायथ, बिहारी लाल जस्टा ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के साथ जो भद्दा मजाक किया है, उसे प्रदेश का कर्मचारी तबका कभी भी नहीं भुला सकता। सरकार ने अपने कर्मचारियों को पंजाब सरकार की तर्ज पर संशोधित समस्त भत्ते और ग्रेड-पे न देकर नाइंसाफी की है। हेम सिंह ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालते कहा था कि जैसे ही पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान और भत्ते लागू करेगी उसके 24 घंटों के भीतर प्रदेश के कर्मचारियों को भी लाभ प्रदान किए जाएंगे। विडंबना है कि साढे़ चार वर्ष का कार्यकाल बीत जाने के उपरांत भी प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों को संशोधित भत्तों से वंचित रखा है। संशोधित वेतनमान के एरियर का भुगतान भी टुकड़ों टुकड़ों में करके कर्मचारियों को मिलने वाली ब्याज राशि से भी महरूम कर दिया। सरकार ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को सरकारी दस्तावेज बनाया। इसमें कहा था कि हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण को सुदृढ़ बनाया जाएगा। ऐसा न कर सरकार ने जड़ से समाप्त कर डाला ताकि कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा सके। प्रदेश में विभिन्न विभागों में हजारों पद रिक्त चल रहे हैं। बेरोजगारों की संख्या लाखों में होने के बावजूद खाली पदों को भरने में सरकार उदासीन हैं। करूणामूलक आधार पर नौकरी पाने के लिए आश्रित पांच वर्षों से इंतजार की कतार में खड़े हैं। आश्रितों को नौकरी देने के लिए नित नए नियम बनाकर सरकार आश्रितों के सब्र का इम्तिहान लेती रही। अनुबंध आधार, रोगी कल्याण समिति पर लगे कर्मचारियों को नियमित करने के लिए सरकार के पास कोई ठोस और सरल नीति, नियम नहीं है। साढ़े चार वर्ष के कार्यकाल में सरकार को कर्मचारियों की कोई याद नहीं आई और अब चुनावी वर्ष में नित नई घोषणाओं के प्रलोभन देकर कर्मचारियों का चुनाव में समर्थन प्राप्त करने की कोशिश में जुटी है। सरकार को आने वाले समय में अपनी करनी खुद भुगतनी होगी।
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