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सेब के बगीचों में कैंकर रोग का कहर

Kullu

Updated Wed, 05 Dec 2012 05:30 AM IST
खराहल (कुल्लू)। कुल्लू घाटी के बगीचों में पतझड़ के बाद कैं कर रोग ने बागवानों की नींद उड़ा दी है। बीमारी को लेकर बागवान खासे चिंतित हैं। सेब के साथ अब यह रोग नाशपाती के पेड़ों में भी तेजी से फैलने लगा है। बागवानों का कहना है कि पुराने पेड़ों पर इस बीमारी का प्रकोप अधिक नजर आ रहा है। इन दिनों बागवान अपने बगीचों को संवारने में जुटे हैं। लेकिन जाड़े के बाद कैंकर रोग की बीमारी साफ तौर नजर आ रही है।
आलम यह है कि घाटी के बागवानों को अत्यधिक कैंकर रोग की चपेट में आए पेड़ों को मजबूरन काटना पड़ा है। कई तरह के फफूंद से फैलने वाला यह रोग सेब के बगीचों में कैंसर की तरह पांव पसार रहा है। पेड़ों पर कैंकर का एक जख्म होने से पूरा का पूरा पेड़ तबाह हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सेब के बगीचों में कैंकर रोग चार किस्म का होता है। कालीसड़न, गुलाबी बीमारी, नेल हेड़ड तथा भूरावृत रोग पेड़ों की खाल को धीरे-धीरे अपनी चपेट में लेता है। इसके चलते पूरा पेड़ अंदर से खोखला हो जाता है। कैंकर वोटरियोस, फेरियाकूएकम तथा वोडरोयोवे सिडियम सालमो निकूलर फफूंद से फैलता है।
बागवान अरुण ठाकुर, खराहल के चमन ठाकुर, सेऊबाग के ऋषि राज, सुरेश पुजारी, छारगड़ी के गोपाल राणा, व्यासर के ज्ञान ठाकुर, थरमान के जीआर ठाकुर, नग्गर निवासी यश्व राज ठाकुर, सरसेई के बागवान नीतिश ठाकुर ने बताया कि उनके बगीचों में कैंकर रोग ने पांव जमाने शुरू कर दिए हैं। अब यह रोग नाशपाती के पेड़ों में फैलना शुरू हो गया है।

ऐसे करें पौधों का उपचार
डा. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्व विद्यालय बजौरा के सह निदेशक डा. जयंत ने बताया कि कैंकर रोग की रोकथाम के लिए संतुलित खाद फासफोरस और पोटाश को गोबर के साथ मिलाकर पौधों में डालना चाहिए। पौधे की प्रुनिंग ठीक तरीके से करके कैंकर के घाव को तेज चाकू से साफ करके उस पर व्लाइटक्स या चौपाटिया पैंट लगाना चाहिए।

विभाग के पास दवाइयां उपलब्ध
जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक डा. बीएस राणा ने कहा कि कैंकर रोग अमूमन पुराने पेड़ों में फैलता है। बताया कि नई पौध में कैंकर न फैले इसके लिए विभाग समय-समय पर बागवानों को जागरूक करता रहता है। यह एक सामान्य रोग है। बागवान थोड़ी एहतियात बरतें तो इस बीमारी से निजात पाया जा सकता है। इस रोग की तमाम दवाइयां विभाग के पास उपलब्ध हैं।
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