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चार दशक से जमीन के टुकड़े की तलाश

Kangra

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। पौंग बांध विस्थापित 39 साल बाद भी पुनर्वास के लिए ठोकरें खाने को मजबूर हैं। विस्थापितों ने पुनर्वास के लिए विस्थापित अश्विनी अवस्थी के नेतृत्व में प्रदेश उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार राजस्थान में उनके पुनर्वास के लिए आरक्षित 1188 मुरब्बा भूमि ही आवंटित करने की गुहार लगाई गई। प्रदेश हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को आरक्षित भूमि पर ही विस्थापितों के पुनर्वास के आदेश दिए। अब राजस्थान सरकार ने हिमाचल हाईकोर्ट के पौंग विस्थापितों के हक में दिए पुनर्वास के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे दी है। इससे पौंग विस्थापितों के पुनर्वास की उम्मीद को जोरदार धक्का लगा है।
पौंग विस्थापितों ने रविवार को स्थानीय विश्रामगृह में पौंग बांध विस्थापित संघर्ष समिति के अध्यक्ष तीर्थ राम शर्मा की अध्यक्षता में बैठक की। इसमें राजस्थान में अपने पुनर्वास के हकों को प्राप्त करने के लिए राजस्थान सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में जाने का फैसला लिया है। शर्मा ने बताया कि पौंग बांध के निर्माण से पहले यहां के विस्थापितों को राजस्थान में पुनर्वासित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार राजस्थान में भूमि आरक्षित की गई थी। लेकिन राजस्थान सरकार ने उसकी जगह बंजर भूमि पौंग विस्थापितों को अलाट करने का फैसला सुनाया। दो महीने पहले विस्थापित अश्विनी कुमार के नेतृत्व में शिमला हाईकोर्ट में पौंग विस्थापितों ने अपील दायर की थी कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले अनुसार राजस्थान में पौंग विस्थापितों के लिए आरक्षित भूमि ही पुनर्वास के लिए अलाट की जाए। शिमला हाईकोर्ट ने विस्थापितों के हक में फैसला दिया। लेकिन राजस्थान सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देकर उनके पुनर्वास को एक बार फिर लटका दिया है। बैठक में विशंभर दत्त, सुरिंद्र शर्मा, रोशन लाल, प्रकाश चंद, सूरम सिंह, दिलीप चंद, सूरम चौधरी और प्रवीण कुमार आदि मौजूद थे।

वीरभद्र सिंह ने दिया आश्वासन
शर्मा ने बताया कि चार दिन पहले उनका एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मंत्री वीरभद्र सिंह से मिला। उन्होंने भी सर्वोच्च न्यायालय में राजस्थान सरकार के खिलाफ पुनर्वास की अपील करने की सलाह दी और उन्होंने वकील भी मुहैया करवा दिया है। शर्मा ने बताया कि वीरभद्र सिंह ने आश्वासन दिया है कि सर्वोच्च न्यायालय में पौंग विस्थापितों की हकों की लड़ाई लड़ने में पूरा सहयोग दिया जाएगा।

2981 को नहीं मिले मुरब्बे
पौंग बांध बनने से करीब 16100 परिवार विस्थापित हुए थे। इनमें से 2981 परिवारों को अभी तक मुरब्बे नहीं मिले हैं। वे अपने हक की लड़ाई अरसे से लड़ रहे हैं। लेकिन, हर बार उन्हें मायूसी ही हाथ लगी रही है।
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