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रिक्त पदों के विरुद्घ नियमित होने की शर्त हटाई जाए

Bilaspur

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
बिलासपुर। एमसी इंपलाइज यूनियन जिला बिलासपुर का कहना है कि नगर परिषद, नगर पंचायतों के कर्मचारियों को अपनी मांगों को लेकर 25 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक पर उम्मीद बंधी है।
यूनियन के प्रधान नंद किशोर राणा ने कहा कि नगर परिषद व नगर पंचायतों के कर्मचारियों की मांगें लंबे अरसे से सरकार के पास विचाराधीन है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों को अन्य विभागों के कर्मचारियों की तरह पूरी करेगी। यूनियन की मांग है कि नगर परिषद व नगर पंचायत के कर्मचारियों के वेतन का प्रबंध सरकार के स्तर पर हो तथा इसका शीर्ष निदेशालय में बने व कर्मचारियों के पेंशन भाग प्रति माह निदेशालय में जमा किया जाए और पेंशन भी निदेशालय से ही दिलाई जाए। जैसा कि हिमाचल प्रदेश नगर पालिका सेवा अधिनियम में प्रावधान है।
इसके अलावा पदोन्नति के लिए डीपीसी बिठाकर तुरंत प्रमोशन की जाए। क्योंकि नगर परिषद व नगर पंचायतों के कर्मचारी 20-25 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत है और पदोन्नति का लाभ लिए बिना ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
यूनियन के प्रधान नंद किशोर राणा ने कहा कि पिछले करीब 20 वर्र्षों से परिषद के कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए योग्यता पूर्ण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। नगर परिषद इन रिक्त पदों को बाहरी कर्मचारियों से न भर कर जो योग्यता पूर्ण चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हीं से प्राथमिकता के आधार पर पदोन्नति के माध्यम से भरा जाए। क्योंकि नगर पंचायतों व नगर परिषदों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। इस बारे में कई बार लिखित रूप में शहरी विकास विभाग के निदेशक को अवगत करवाया गया। लेकिन विभाग की ओर से नगर परिषद व नगर पंचायतों के कर्मचारियों की सेवाओं का मामला केंद्रीकरण व विकेंद्रीकरण के लिए प्रदेश सरकार के विचाराधीन होने की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों से अनुबंध आधार पर नियुक्त कर्मचारी अपनी विभिन्न पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन सरकार द्वारा रिक्त पदों के विरुद्ध ही नियमित करने की शर्त लगा रखी है। इस शर्त के होने से अनुबंध कर्मचारी नियमित होने से वंचित रह रहे हैं। इसलिए इस शर्त को हटाया जाए, ताकि अनुबंध कर्मचारी नियमित हो सके।
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