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एफडीआई को मंजूरी देश के लिए घातक

Bilaspur

Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
बिलासपुर। स्वदेशी जागरण मंच ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश को अनुमति देने की कड़ी आलोचना की है। संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार देश की जनता के हितों को नजरअंदाज करके आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक व अमेरिका को खुश करने में जुटी हुई है। इसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे। संगठन ने लोगों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर 20 सितंबर को एफडीआई के विरोध में भारत बंद को सफल बनाने का आह्वान किया है।
स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत विचार मंडल प्रमुख एवं राष्ट्रीय परिषद सदस्य इंद्र ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2010 में देश के छोटे व मध्यम कारोबारियों ने 1.20 करोड़ दुकानों के माध्यम से लगभग 5 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करते हुए 20 लाख करोड़ रुपये का व्यापार किया। इसकी तुलना में अकेली वालमार्ट कंपनी ने 9884 स्टारों में 21 लाख लोगों के माध्यम से इतना ही व्यापार किया। ऐसी कंपनियां देश में खुदरा व्यापार को तहस-नहस करने के लिए पहले चरण में 5 लाख तक की आबादी वाले चुनिंदा शहरों में अपना जाल फैलाएंगी। उसके बाद यह कंपनियां छोटे कस्बों तक अतिक्रमण करके रेहड़ी-फड़ी, यहां तक कि किसी कोने में बैठकर मोची की दुकान करने वालों को समाप्त कर देंगी। अब यह फैसला देश की जनता को करना है कि वह 4.79 करोड़ लोगों का रोजगार खत्म करके विदेशी निवेश के नाम पर बेकार होना चाहती है या इन लोगों से जुड़े हुए करीब 25 करोड़ देशवासियों के ग्रास को जिंदा रखना चाहती है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे एफडीआई के विरोध में 20 सितंबर को भारत बंद को सफल बनाएं।

भाषा शिक्षकों को जल्द मिले बैचवाइज नियुक्ति
बिलासपुर। शिक्षा विभाग में बैचवाइज नियुक्ति को लेकर अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण भाषा शिक्षकों के इंतजार की घड़ियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। नीरज ठाकुर, कामिनी शर्मा, रेणुबाला, चंद्रकांता शर्मा व अशोक मिश्रा आदि ने कहा कि भाषा अध्यापकों के लिए भरती एवं पदोन्नति नियम 2011 के अनुसार अध्यापक पात्रता परीक्षा का आयोजन बीते वर्ष दिसंबर में किया गया था। एक वर्ष बीतने को है, लेकिन भरती व पदोन्नति नियम 2011 में संशोधन न होने के कारण भाषा अध्यापकों की बैचवाइज भरती आज तक नहीं हो पाई है। जल्द ही चुनाव आचार संहिता लागू होने की संभावना है। ऐसे में भाषा अध्यापकों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि भाषा अध्यापकों के भरती व पदोन्नति नियम 2011 में टीईटी की अनिवार्यता की शर्त जोड़कर आचार संहिता लागू होने से पहले उनकी बैचवाइज नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
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