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जगाधरी का सरकारी अस्पताल खुद बीमार

Yamuna Nagar

Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
जगाधरी। जगाधरी के बीमार सरकारी अस्पताल को इन दिनों इलाज की दरकार है। अस्पताल में डाक्टरों और उपकरणों की भारी कमी के चलते मरीजों को शहर के निजी और यमुनानगर के सरकारी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है। जन कल्याण परिषद के अधिकारियों ने भी सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ज्ञापन भेजकर अस्पताल की स्थिति दुरुस्त करवाने की मांग की है।
जगाधरी के सरकारी अस्पताल में नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ, न्यूरोलॉजिस्ट, छाती रोग विशेषज्ञ, आंख रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके अलावा अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन, डिजिटल एक्स-रे प्लांट और 50 केवीए का जनरेटर सेट भी नहीं है। यही वजह है कि उपरोक्त बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। हालांकि अस्पताल में रोजाना 500 मरीजों की ओपीडी होती है जिसमें अधिकांश मरीज उपरोक्त बीमारियों से संबंधित होते हैं।
दूरदराज के मरीज आते हैं जगाधरी
जगाधरी के सरकारी अस्पताल में पांवटा साहिब और नारायणगढ़ तक के मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा खिजराबाद, छछरौली, बिलासपुर, साढौरा, मुस्तफाबाद, रादौर, जगाधरी शहर और आसपास गांवों के मरीज आते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक महीने में करीब 15 से 20 हजार की ओपीडी हो जाती है। जब मरीजों को जगाधरी के सरकारी अस्पताल में पूरा इलाज नहीं मिलता तो उन्हें मजबूरन यमुनानगर के सरकारी अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है जो जगाधरी के अस्पताल से करीब छह किलोमीटर दूर है। यमुनानगर के सरकारी अस्पताल में पहुंचने के लिए मरीजों को पहले किसी तरह से बस स्टैंड जगाधरी आना पड़ता है जहां से वे आटो के जरिए यमुनानगर के सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं। इस प्रक्रिया में जहां प्रत्येक मरीज को 35 से 40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं वहीं समय की भी बरबादी होती है।
बत्ती गुल होने पर छा जाता अंधेरा
जगाधरी का सरकारी अस्पताल हॉट लाइन से नहीं जुड़ा है। यही वजह है कि बत्ती गुल होने के बाद अस्पताल में अंधेरा छा जाता है। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इनवर्टर लगाया हुआ है, लेकिन वह ज्यादा देर तक नहीं चल पता। सर्दियों में तो जैसे तैसे काम चल जाता है लेकिन गर्मी के दिनों में मरीजों बुरा हाल हो जाता है।
दवाओं और भोजन के लिए भटकना पड़ता
अस्पताल परिसर में सस्ती दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर की व्यवस्था न होने की वजह से मरीजों और उनके परिजनों को दवाओं के लिए भटकना पड़ता है। मजबूरन उन्हें अस्पताल के बाहर बने मेडिकल स्टोर्स से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। पहले अस्पताल परिसर में रेडक्रास द्वारा एक मेडिकल स्टोर चलाया जा रहा था। करीब चार साल पहले से बंद कर दिया गया। इसके अलावा अस्पताल परिसर में कैंटीन की भी सही प्रकार से व्यवस्था नहीं है जिस कारण मरीजों और उनके अभिभावकों को चाय, दूध और अन्य खाद्य पदार्थ के लिए बाहर का रुख करना पड़ता है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी
सिविल अस्पताल के एसएमओ डा. एसके राठी का कहना है कि जगाधरी के सरकारी अस्पताल में नौ चिकित्सकों की पोस्ट है जबकि अस्पताल में 12 डाक्टर तैनात हैं जिनमें से तीन एसएमओ और नौ मेडिकल अफसर हैं। अस्पताल में दो डाक्टर बेहोशी के, दो डाक्टर हड्डी रोग विशेषज्ञ, तीन डाक्टर एमबीबीएस, एक डाक्टर सर्जरी, एक डाक्टर मेडिसन, एक डाक्टर स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक डाक्टर बाल रोग विशेषज्ञ, एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट है। अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी की वजह से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जन कल्याण परिषद की सीएम से गुहार
सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों की व्यवस्था की मांग को लेकर जन कल्याण परिषद ने सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ज्ञापन भेजकर गुहार लगाई है। परिषद सचिव लाल चंद का कहना है कि 2003 में पांच लाख की लागत से आई क्यू सेंटर बनाया था जबकि ढाई लाख लागत से मशीन लगवाई थी जिसका मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पताल को 60 बेड का घोषित किया हुआ है लेकिन उसके मुताबिक सुविधाएं नहीं है। डाक्टरों की कमी की वजह से मरीजों को दिक्कतों का समाना करना पड़ता है।

वर्जन
स्पेशलिस्ट डाक्टरों की नियुक्ति के लिए आला अधिकारियों से मांग की गई है। इसके अलावा अस्पताल में जो उपकरण नहीं हैं उसकी भी मांग की हुई है।
-डा. एसके राठी, एसएमओ, सिविल अस्पताल, जगाधरी।
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