आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

जीवंत झांकी बनेगा धरोहर पार्ट-टू

Yamuna Nagar

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
कुरुक्षेत्र। अगर हरियाणवी संस्कृति का अद्भुत नमूना देखना है तो इसके लिए थोड़ा इंतजार बचा है। ये झलक आपको कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के धरोहर हरियाणा संग्रहालय भाग-दो में मिलेगी। धरोहर का ये नया भाग जल्द खुलने जा रहा है। इसे फाइनल टच देने की तैयारी युद्ध स्तर पर जारी है। हरियाणवी लोक जीवन में प्रचलित ग्रामीण काम-धंधों की जीवंत झांकी धरोहर के दूसरे भाग में प्रस्तुत की जा रही है। इस झांकी में हरियाणवी लोक जीवन के सभी काम-धंधों को हू-ब-हू चित्रित किया जा रहा है। ग्रामीण लोक जीवन में महिलाओं का केंद्र रहा पनघट, जिस पर महिलाएं सामूहिक रूप से पानी भरती थी का चित्रण भी इस भाग में किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस कुएं पर हरियाणवी महिलाएं विविधायामी पोशाक सहित पानी भरती दिखाई देंगी।
इसके अतिरिक्त ग्रामीण संस्कृति का केंद्र रहा कोल्हू भी इस भाग में स्थापित किया जा रहा है। हरियाणवी लोक जीवन में कोल्हू की परंपरा अत्यंत प्राचीन रही है। इस पारंपरिक परपरा को धरोहर हरियाणा संग्रहालय में जीवंत किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कोल्हू में जुते हुए बैल दर्शकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बनेंगे, क्योंकि इन बैलों के पीछे लगी पैंठ पर आगंतुक कोल्हू की सवारी किया करेंगे। इसके अतिरिक्त संग्रहालय में हरियाणवी लोक जीवन से जुड़ी हुई विविध-कलाओं जैसे - भित्ति-चित्र, मांडणें, अहोई, चित्तण, सांझी आदि के विविधायामी स्वरूप भी देखने को मिलेंगे। संग्रहालय के इस भाग में खुला मंच और ओपन एयर थियेटर भी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें हरियाणवी लोक जीवन से जुड़ी हुई संस्कृति के उन पक्षों को जीवंत किया जाएगा, जो लुप्त होने की कागार पर है या लुप्त प्राय: हो चले हैं।
इस सभागार में लगभग पांच सौ आदमियों के बैठने की व्यवस्था भी की गई है। संग्रहालय के अंदर हरियाणवी खान-पान से संबंधित रेस्टोरेंट भी स्थापित किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक खाने के साथ-साथ हरियाणवी लोक जीवन से जुड़े खान-पान को आगंतुकों के लिए तैयार किया जाएगा। इस रेस्तरां की सबसे बड़ी विशेषता यही रहेगी कि इसमें हरियाणा से जुड़े हुए खान-पान व पेय पदार्थ पर्यटकों के लिए उपलब्ध होंगे। इसके अतिरिक्त धरोहर हरियाणा संग्रहालय में एक आर्ट गैलरी की स्थापना भी की जा रही है। इस गैलरी में हरियाणा के कलाकार अपने चित्रों, चित्र कलाओं, हस्त कलाओं तथा विविध कलाओं से जुड़ी प्रदर्शनियों का आयोजन कर पाएंगे। इस आर्ट गैलरी से हरियाणा के कलाकारों को एक ऐसा मंच उपलब्ध होगा, जिससे कलाकारों की कला का मान-सम्मान तो बढ़ेगा ही इसके साथ-साथ उनको ख्याति भी प्राप्त होगी।
धरोहर हरियाणा संग्रहालय भाग-दो में अलग-अलग परंपरागत काम-धंधों को जीवंत करने का प्रयास किया जा रहा है। काम-धंधों की कड़ी में ठठेरे की जीवन शैली, कलई करने की प्रक्रिया, परंपरा तथा इतिहास के साथ-साथ पुरातन बर्तनों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसी प्रकार सुनार के भाग में प्राचीन काल में सुनार किस प्रकार चांदी और सोने के जेवर बनाया करता था, हरियाणवी जेवर कौन-कौन से हैं? उनके बनाने की प्रक्रिया क्या है? इन सभी को इस भाग में चित्रित किया जाएगा। इसी कड़ी में मणियार का भाग भी स्थापित किया जा रहा है, क्योंकि हरियाणवी लोक जीवन में मणियार की अत्यंत प्राचीन परंपरा रही है। इस भाग में हरियाणा में अलग-अलग स्थानों से खुदाई में निकली हुई चूड़ियां तो प्रदर्शित की ही जाएंगी। इसके अतिरिक्त उनकी प्राचीनतम एवं विविधता व लोक जीवन में महत्ता को भी दर्शाया जाएगा। इतना ही नहीं, तुलियों से बनाए जाने वाले पिटार, छाज, खिलौने, संडोरी, बोधवा आदि के माध्यम से भी हरियाणवी लोक जीवन में तुली की परंपरा तथा उसके इतिहास को दर्शाया जाएगा।
टोकरे बनाने वाले भाग में बांस और तूंत से बनने वाली टोकरों की परंपरा को दर्शाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इसी भाग में हाथ से बनने वाली चंगेरियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इससे अगले भाग में कुम्हार का हरियाणवी जीवन में कितना महत्व रहा है, उस चीज को कुम्हार के भाग में दर्शाया जाएगा, जिसमें हरियाणा के अलग-अलग भागों से खुदाई में निकले हुई प्राचीन मृद भाण्डोें को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कुम्हार की मिट्टी खोदने से लेकर मटके बनाने तक की संपूर्ण प्रक्रिया को दर्शाया जाएगा। इसी से लगते भाग में हरियाणा में ईंटों की प्राचीन परंपरा को दर्शाया जा रहा है। हरियाणा की अलग-अलग पुरातात्विक स्थलों से खुदाई में निकली ईंटों की परंपरा उनकी महत्ता तथा उनके पकाने की प्रक्रिया को भी इस भाग में दर्शाया जाएगा। इससे अगले भाग में हरियाणवी लोकजीवन में राजमिस्त्री की परंपरा के इतिहास एवं प्रक्रिया को दिखाया जाएगा।
जुलाहे का हरियाणवी लोक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हाथ से कपड़ा बुनने की परंपरा, खड्डी, सुत कातने, सुखाने, तैयार करने तथा उसकी निर्माण प्रक्रिया को इस भाग में दिखाया जाएगा। इसके अतिरिक्त अहीरवाल भाग में अहीरवाल से जुड़ी हुई लोक सांस्कृतिक झलक देखने को मिलेगी। अहीरवाल से प्राप्त किए गए सामान को इस भाग में प्रदर्शित किया जाएगा। हरियाणवी लोक जीवन में पत्थर की निर्माण शैली का अपना महत्व है। चौंत्तरी बनाने की प्रक्रिया, इसके अतिरिक्त पत्थर में कढ़ाई का काम, औखल, सिलबट्टे, कुंडियां आदि की विविधताओं, इतिहास एवं संपूर्ण प्रक्रिया को इस भाग में दर्शाया जाएगा। हरियाणवी लोक जीवन की पारंपरिक वाणिज्य, बणिक अथवा बणिया परंपरा को भी धरोहर भाग-दो में दर्शाया जा रहा है। उसके पारंपरिक स्वरूप तथा उसकी विषय वस्तुओं को इस भाग का हिस्सा बनाया जाएगा। हरियाणवी लोक जीवन में बढ़ई का महत्वपूर्ण योगदान है। लकड़ी से बनने वाली सभी विषय वस्तुओं को बढ़ई किस प्रकार अमलीजामा पहनाता है? हल, चरखा, रई तथा अन्य लोक जीवन की उपयोगी वस्तुओं को बनाने की प्रक्रिया तथा उसकी पुरातनता को इस भाग में दर्शाया जाएगा। लीलगर का हरियाणवी लोक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान होता है। किस प्रकार वह प्राकृतिक रंगों से रंगों का निर्माण करता था तथा देशी ठप्पों द्वारा रेज्जे के कपड़ों की किस प्रकार रंगाई करता था, इसकी परंपरा एवं इतिहास को इस भाग में प्रदर्शित किया जा रहा है। दर्जी हरियाणवी लोक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। हमारी पारंपरिक वेशभूषा की निर्माण शैली, इतिहास और वेशभूषा के सभी तरह के प्रकार एवं विविधताओं को इस भाग में प्रदर्शित किया जाएगा। चर्मकार के भाग में चमड़े से बनने वाली अलग प्रकार की जूतियों और विषय वस्तुओं को दर्शाया जाएगा। बृज एवं मेवात हरियाणवी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, वहां के लोक जीवन की झांकी बृज भाग में दिखाई जा रही है। हरियाणा के इस क्षेत्र की क्या परंपरा है, इसका क्या इतिहास है तथा उसकी लोक जीवन शैली आदि को इस भाग में प्रदर्शित किया जा रहा है। बैलखाने में हरियाणा के परिवहन के साधनों, जिसमें रथ, बैलड़ी, बैलगाड़ी, घोड़ा-गाड़ी, टमटम, तांगा, रेहड़ा, रेहड़ी, मंझौली, गड्डा आदि को प्रदर्शित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त हरियाणवी लोक जीवन एवं लौहार का परस्पर गहरा नाता रहा है। लोहे की विषय वस्तुओं एवं किसानी संस्कृति में लौहार का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। लोहे की किन-किन वस्तुओं का वह किस-किस तरीके से बनाता है, उसकी संपूर्ण प्रक्रिया, आरण तथा अन्य साजो-सामान को इस भाग में दिखाया जाएगा। वहीं, हरियाणवी लोक जीवन में नाई का महत्वपूर्ण योगदान है, उसके इतिहास एवं परंपरा को नाई के भाग में स्थापित किया जाएगा। सिकलीगर के भाग में ताला बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया, सिकलीगरों का इतिहास, प्रक्रिया और तालों की विविधताओं का इतिहास विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होगा। इसके अतिरिक्त ग्रामीण देवता खेड़ा की भी स्थापना धरोहर हरियाणा संग्रहालय के भाग-दो में की जा रही है। इसके माध्यम से खेड़े का इतिहास एवं परंपरा को भी दर्शाया जाएगा। इस भाग में हरियाणवी हस्त कला से संबंधित सेल काउंटर भी स्थापित किया जाएगा, ताकि हरियाणा की कला के विविध स्वरूपों को हरियाणवी-प्रेमी खरीद कर उसे अपने जीवन का हिस्सा बना सकें।

हरियाणा के अलग राज्य से बने कुरुक्षेत्र के ये नवरत्न
पंजाब से अलग होकर अलग प्रांत बने हरियाणा से जहां इस सूबे की सूरत बदली, वहीं कुरुक्षेत्र भी इस प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभर कर सामने आया। आज हेरिटेज सिटी के नाम से विख्यात कुरुक्षेत्र में केडीबी, भारत का एकमात्र श्री कृष्ण संग्रहालय, डिजीटल महाभारत गैलरी, कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र, कल्पना चावला तारा मंडल, हरियाणा का एकमात्र कला, शिल्प एवं सांस्कृतिक कलाकारों का मंच मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर, विश्व का सबसे बड़ा धातु रथ ब्रह्मसरोवर तट पर दो करोड़ की लागत से बना है। विशालकाय महाभारत का प्रतीक चिह्न कृष्ण-अर्जुन का ये धातु रथ आज कुरुक्षेत्र का सिंबल बन चुका है। इसके अलावा हरियाणा का एकमात्र धरोहर संग्रहालय और ज्योतिसर तीर्थ में महाभारत लाइट एंड साउंड कुरुक्षेत्र के नवरत्न बन चुके हैं।
हरियाणा राज्य के गठन के ठीक 21 माह बाद कुरुक्षेत्र और महाभारत युद्ध के 48 कोस क्षेत्र में स्थित पौराणिक तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया गया। पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा के प्रयासों से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) की स्थापना एक अगस्त 1968 को हुई। आज प्राचीन कुरुक्षेत्र की 48 कोस की धरा में स्थित पौराणिक तीर्थों के विकास का जिम्मा केडीबी के हाथों में है। केडीबी के कार्यालय सचिव एवं संपदा अधिकारी राजीव शर्मा के मुताबिक विकास बोर्ड ने 1999 में कुल 134 तीर्थों को जीर्णोद्धार के लिए चिह्नित किया है, इनमें से 15 तीर्थों का जीर्णोद्धार हो चुका है, जबकि पांच तीर्थों पर विकास कार्य जारी है। इसके अलावा 18 ऐसे तीर्थ हैं, जिनके विकास के लिए करीब 13 करोड़ रुपये की प्रपोजल केंद्रीय पर्यटन विकास मंत्रालय को भेजी गई है।

इन 15 जगहों पर हो चुका है जीर्णोद्धार
ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर, ज्योतिसर, भीष्म कुंड नरकातारी, बाणगंगा दयालपुर, सरस्वती तीर्थ पिहोवा, शालिनीहोत्र तीर्थ सारसा, ऋण मोचन तीर्थ रसीना जिला कैथल, कपिलमुनि तीर्थ कलायत जिला कैथल, वृह्द केदार तीर्थ जिला कैथल, सर्पदमन तीर्थ सफीदों जिला जींद, सोम तीर्थ पांडू पिंडारा जिला जींद, काया शोधन तीर्थ कसूहण जिला जींद, लोकेश ऋषि तीर्थ गांव लोधर जिला जींद में जीर्णोद्धार हो चुका है।

इन पांच तीर्थो पर जीर्णोद्धार कार्य जारी
किरमिच कुलतारण तीर्थ, ब्रह्मतीर्थ गांव थाना पिहोवा, वेदवती तीर्थ सीतामाई करनाल, दस अश्वमेध तीर्थ सालवन जिला करनाल और तरंतुक यक्ष गांव सींख जिला पानीपत में काम चल रहा है।

इन 18 तीर्थों के लिए केंद्र को भेजी प्रपोजल
18 तीर्थों के विकास के लिए भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को 12 करोड़ 17 लाख रुपये का प्रोजेक्ट भेजा गया है। इनमें कम्येक तीर्थ, कमोदा कुरुक्षेत्र, कैथल के 12 तीर्थ हैं, जिनमें फल्गु तीर्थ फरल, सूर्य कुंड तीर्थ हावड़ी, श्रृंगी ऋषि तीर्थ गांव सांगन, सूर्य कुंड तीर्थ गांव सजूमा, कुलतारण तीर्थ और कपिल मुनि तीर्थ गांव कौल, रंतुक यक्ष बैरसाहेब, गोभवन तीर्थ गांव गुणा, स्वर्ग द्वार तीर्थ गांव सीवन, धनंजय तीर्थ गांव डोढा खेड़ी, अलेपक तीर्थ गांव साकरा, कोटी कुट तीर्थ गांव कयोड़क, जबकि पांच तीर्थ जिला जींद के शामिल हैं। इनमें रामह्रद तीर्थ गांव रामराय, भूतेश्वर तीर्थ जिला जींद, वराह तीर्थ वराह कलां, पुष्कर तीर्थ गांव पोखरखेड़ी, अश्विनी तीर्थ गांव आसन शामिल हैं।

... और 75 माह कुरुक्षेत्र बना था जिला
एक नवंबर 1966 को हरियाणा जहां अलग राज्य बना, वहीं इसके 21 माह बाद एक अगस्त को केडीबी का गठन हुआ, जबकि 75 माह बाद 23 जनवरी 1973 को करनाल से अलग होकर कुरुक्षेत्र जिले का गठन हुआ।

तिरुपति के बाद इस्कॉन, अक्षरधाम का इंतजार
तिरुपति बाला जी के मंदिर के निर्माण को हरी झंडी मिल चुकी है। मंदिर का शिलान्यास हो चुका है। कुरुक्षेत्र के अध्याय में इस मंदिर की स्थापना मील का पत्थर साबित होगी, वहीं इसके बाद अस्कॉन टेंपल और अक्षर धाम मंदिर की स्थापना के लिए भी सरकारी तौर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

महिलाओं के लिए आ गई एक्टिवा 'आई', खूबियां जीत लेंगी दिल

  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

कंगना के घर में आई खुशियां, जल्द आएगा नन्हा मेहमान

  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

मोबाइल के टेक्स्ट मैसेज को दूसरे फोन में कैसे करें ट्रांसफर

  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

'नो एंट्री' के सीक्वल में सलमान खान का डबल धमाका

  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

मेष राशि वालों को इस सप्ताह होगा अपनी गलतियों का अहसास, जानें अपना प्रेम राशिफल

  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

शहीद कैप्टन के घर पहुंचे अख‌िलेश, बोले- 'अपनी ताकत का एहसास कराए सरकार'

martyr captain's body will come today
  • शनिवार, 29 अप्रैल 2017
  • +

योगी की चेतावनी- 9 से 6 ऑफिस में ही दिखें, कभी भी बज सकता है फोन

press con of minister shrikant sharma
  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

अंकल पेंट मत करना, पापा दरोगा हैं, इसके बाद सीओ ने क्या किया

Do not paint uncle, Papa is Daroga, what did the CO do after this
  • गुरुवार, 27 अप्रैल 2017
  • +

दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया ISI एजेंट, भारत में बसने की जताई इच्छा

Pakistani Man Baffling Claim as ISI agent At Delhi Airport
  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +

शहीद की मां का दर्द,‘प्रधानमंत्री से कुछ नहीं होता तो मैं ही कर दूंगी आतंकवादियों का खात्मा’

martyr ayush mother says about pm modi
  • शनिवार, 29 अप्रैल 2017
  • +

पार्टी की एकजुटता के लिए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दें अखिलेश : शिवपाल यादव

Akhilesh resign for party unity: Shivpal Yadav
  • शुक्रवार, 28 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top