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अभिभावक सही और गलत की पहचान करवाएं

Yamuna Nagar

Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
यमुनानगर। महिलाओं से हो रही वारदातों के पीछे कई कारण हैं। गिरते नैतिक मूल्य, पाश्चात्य संस्कृति का दखल, फिल्म, विज्ञापन और इंटरनेट पर परोसी जा रही अश्लीलता, ऐसे कई कारण हैं जिनके कारण आज नारी सुरक्षित नहीं है। छेड़छाड़ करने वाला व्यक्ति जितना दोषी है, उतना ही समाज भी है। सबसे पहले तो गिरते नैतिक मूल्यों को फिर से संजोना होगा। इसके लिए जरूरी है कि अभिभावक शुरू से ही बच्चों को सही और गलत की पहचान करवाएं। इसके अलावा समाज में खुले तौर पर परोसी जा रही अश्लीलता पर लगाम लगानी होगी। इसके लिए सेंसर बोर्ड को आगे आकर गलत संदेश देने वाली सामग्री पर रोक लगानी होगी। मीडिया को भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी होगी। छेड़छाड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने में टीडीटीआर डीएवी फिजियोथैरेपी इंस्टीट्यूट की छात्राओं ने अपनी राय दी।
टीडीटीआर डीएवी फिजियोथैरेपी इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल डा. रामबाबू का कहना है कि लोगों की गलत मानसिकता के कारण छेड़छाड़ की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। फिल्म, विज्ञापन, टीवी और इंटरनेट पर परोसी जा रही गलत सामग्री से लोगों की मानसिकता में बदलाव आया है। नुक्कड़ नाटक और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक करना चाहिए।

छात्रा ईशानी अग्रवाल का कहना है कि एक बाइक तीन-तीन लड़के बैठ कर अक्सर लड़कियों से छेड़छाड़ करते हैं। पुलिस को बाइक पर दो से अधिक युवकों को बैठने और ट्रैफिक नियम को तोड़ने पर सख्त सजा देनी चाहिए।

छात्रा शूची का कहना है कि छेड़छाड़ की घटनाओं के लिए पहनावे को जिम्मेदार ठहराया जाता है। अगर ऐसा है तो सरकार को ऐसे ड्रेस बनाने वाले कंपनी पर रोक लगा देनी चाहिए। घटिया मानसिकता वाले लोग सलवार सूट और साड़ी पहनने वाली महिलाओं के साथ भी छेड़छाड़ करते हैं। पहनावे को बदलने की बजाए अपनी सोच बदलनी चाहिए।

छात्रा करिश्मा सक्सेना का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में कमी के कारण युवक छेड़छाड़ कर भाग जाते हैं। प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था में बढ़ोतरी करना चाहिए और नई टेक्नोलॉजी के माध्यम से सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे लोगों पर नजर रखनी चाहिए।

छात्रा प्रीती का कहना है कि लड़कों के साथ-साथ उम्रदराज लोग भी छेड़छाड़ करते हैं। बस, ट्रेन और सार्वजनिक जगहों पर ऐसा होते कई बार देखा जा सकता है। छेड़छाड़ चाहे कोई भी करे, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।
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